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मनमानी वसूली पर नहीं लगी लगाम: आगरा के अस्पतालों ने 56 मरीजों से की अधिक वसूली, नहीं हुई कार्रवाई

Tue, 24 Aug 2021 11:43 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

मनमानी वसूली की आईं 56 शिकायतें, सीएमओ बोले-48 का कर चुके हैं निस्तारण
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अस्पताल का सांकेतिक फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संक्रमण की दूसरी लहर में हर व्यक्ति को इलाज मिल सके। खर्च के नाम पर मनमानी न हो। इसके लिए सरकार ने कोविड अस्पतालों में इलाज के रेट तय किए। इसके बाद भी 56 अस्पतालों ने मरीजों से ज्यादा पैसा वसूला। दो महीने बाद भी पीड़ितों को इंसाफ का इंतजार है। मनमानी करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई अधर में है। जबकि सीएमओ का कहना है कि 48 मामलों का निस्तारण हो चुका है। आठ शिकायतों की जांच चल रही है।

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सात मई को आगरा में मरीजों से मनमानी वसूली करने वाले अस्पतालों के विरुद्ध एफआईआर के आदेश दिए थे। उनके लाइसेंस खत्म करने की बात कही थी, परंतु सीएम के जाने के बाद प्रशासनिक अफसर और स्वास्थ्य विभाग कार्रवाई भूल गया। अधिक वसूली करने वाले 56 अस्पतालों के विरुद्ध शिकायतों के बाद 12 मरीजों के परिजनों को पैसा वापस कराया। बाकी के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई। तीन महीने बाद भी पीड़ित इंसाफ के लिए भटक रहे हैं।  

कर्ज लेकर मिला पिता का शव
कटरा नील, नाई की मंडी निवासी अलतिशा महक के पिता अजीमुद्दीन को 18 अप्रैल 2021 को पल्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। एक लाख रुपये भर्ती के समय ले लिए गए। एक मई 2021 को उनकी मौत हो गई। अस्पताल ने 12 दिन का 4.63 लाख रुपये का बिल दिया। 3.65 लाख रुपये जमा कराए बिना शव देने से इनकार कर दिया। रिश्तेदारों से कर्ज लेकर 3.65 लाख रुपये जमा कराए तब शव मिला। अलतिशा का कहना है कि कर्ज लेकर पिता का इलाज कराया, वह भी नहीं रहे। दो महीने पहले शिकायत दर्ज कराई थी अभी तक अस्पताल के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
चार दिन में 1.18 लाख रुपये का बिल
अवधपुरी निवासी आकांक्षा जोशी की मां अमृता जोशी की जीवन ज्योति हॉस्पिटल में 14 मई को मौत हो गई। 10 मई को उन्हें भर्ती कराया था। कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव थी। चार दिन में 1.18 लाख रुपये का बिल बना। पीड़िता का आरोप है मां के इलाज में लापरवाही बरती गई। डीएम-सीएमओ को दो बार शिकायत की गई। आज तक न हॉस्पिटल की जांच की गई, न कार्रवाई।
बाउंस हो गया चेक
ताजगंज निवासी निजामुद्दीन ने अपने पिता ताज मोहम्मद को 21 अप्रैल को एसआर हॉस्पिटल में भर्ती कराया। 24 अप्रैल को उनकी मृत्यु हो गई। तीन दिन में 75 हजार रुपये का बिल बना। शिकायत के बाद हॉस्पिटल ने 35 हजार रुपये का चेक दिया। बैंक में भुगतान के लिए चेक लगाया तो वह बाउंस हो गया। अब वह चेक लेकर हॉस्पिटल से लेकर सीएमओ कार्यालय के चक्कर काट रहा है।
 
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डीएम ने किया था डिबार
कोविड मरीजों से अधिक बिल वसूली के मामले में अप्रैल में जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने रवि हॉस्पिटल को कोविड इलाज सूची से डिबार किया था। इसके बाद किसी भी अस्पताल के खिलाफ प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की।मेरे आने से पहले की हैं शिकायतें
अधिक बिल वसूली की शिकायतें मेरे आने से पहले की हैं। 56 शिकायतें आई हैं। 48 का निपटारा किया है। बाकी की जांच चल रही है। कुछ लोगों के पैसे वापस कराए हैं। दो अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन अस्पतालों के नाम नहीं बता सकता। - अरुण श्रीवास्तव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

स्वास्थ्य विभाग करेगा कार्रवाई
हमारे पास जो शिकायतें आईं थीं। उनमें मजिस्ट्रेट जांच कराई, रिपोर्ट सहित आख्या स्वास्थ्य विभाग को कार्रवाई के लिए भेजी है। जो भी कार्रवाई होगी वह सीएमओ कार्यालय से होनी है। अपनी जांच रिपोर्ट शासन को भेज चुके हैं। - डॉ. प्रभाकांत अवस्थी, एडीएम सिटी व सदस्य, महामारी लोक शिकायत समिति
 
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