लॉकडाउन में साइबर अपराधी अब ऑफर और लॉटरी के संदेश भेज रहे हैं। ये एसएमएस, व्हाट्सएप, फेसबुक, ई-मेल पर आ रहे हैं। जो इनके झांसे में आया, वह पछताएगा।
अपराधियों के इन हथकंडों से बचने के लिए साइबर सेल ने एडवाइजरी जारी की है। फोन पर खाते, एटीएम कार्ड की जानकारी शेयर नहीं करने, ई वॉलेट पर रुपये आने के झांसे में नहीं आने की सलाह दी है। इसके लिए लोगों को मैसेज और व्हाट्सएप पर जानकारी भेजी है।
रेंज में लॉकडाउन के दौरान लोगों को फोन करके खातों की जानकारी लेकर रुपये निकालने के कई मामले सामने आए थे। साइबर अपराधी लोगों को पीएम रिलीफ फंड, लॉटरी, बीमा आदि का लाभ दिलाने के नाम पर कॉल कर रहे हैं। उन्हें अपनी बातों में फंसाकर खातों की जानकारी ले लेते हैं। तीस से अधिक मामले हाल में आए थे। ऐसे में साइबर सेल ने लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की है।
इन बातों का रखें ध्यान
- अनजान नंबर से कॉल करके अगर कोई खुद को रिश्तेदार, मित्र बताकर आपको फोन पे, गूगल पे, पेटीएम में रुपये भेजने की बोलता है तो समझ जाएं कि आपके साथ साइबर ठगी होने जा रही है।
- केवाईसी अपडेट करने के बारे में बताकर कोई आपको लिंक भेजता है तो क्लिक नहीं करें। ऐसा साइबर अपराधी करते हैं।
- कैश बैक, रिवार्ड प्वाइंट, प्रोमो कूपन के झांसे में न आएं। अपराधी लिंक भेजकर रकम खाते में जमा करने की कहते हैं। समझ जाएं कि साइबर अपराधी हैं।
- फोन पे, गूगल पे का कोई भी लिंक किसी भी माध्यम से आपको प्राप्त हो तो उस पर क्लिक न करें। यदि व्हाट्स एप पर कोई क्यूआर कोड आपको प्राप्त हो तो उसे स्कैन न करें। पे पर क्लिक करने का मतलब आपके खाते से रुपये जा रहे हैं।
- किसी को अपना पिन, ओटीपी, सीवीवी, एटीएम कार्ड, क्रेडिट कार्ड नंबर, यूपीआई पिन, एम पिन शेयर न करें। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए हुए मैसेज को भी किसी के साथ साझा न करें। ईएमआई में छूट, राशन वितरण, रिलीफ फंड या अन्य किसी के नाम पर भी साइबर अपराधी निशाना बना सकते हैं।
- फेसबुक और मैसेंजर पर अगर, कोई मित्र के नाम से रुपये मांगता है तो पहले कंफर्म करें।