ताजनगरी की जहरीली हो रही हवा में हर दिन 36 टन पीएम 10 कण और 50 टन कार्बन मोनोऑक्साइड घुल रही है। सड़कों की धूल से 80 फीसदी प्रदूषण फैल रहा है। अगर इस पर नियंत्रण कर लिया जाए तो ताजनगरी की वायु गुणवत्ता में अप्रत्याशित सुधार आ जाएगा। मंगलवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से आयोजित वेबिनार में यह आंकड़े पेश किए गए।
बोर्ड के प्रभारी अधिकारी और वैज्ञानिक कमल कुमार ने बताया कि आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट में वायु प्रदूषण में पीएम 10 करणों का योगदान सबसे ज्यादा है। सड़कों की धूल और मिट्टी के क्षरण तथा उत्सर्जन के उपाय अपनाए जाएं तो 41 फीसदी की कमी हो सकी है। वाहनों, डीजी सेट, कचरा जलाने पर प्रभावी रोक से आगरा की हवा में सुधार संभव है।
कृषि विभाग के डीडीए महेंद्र सिंह ने बताया कि आगरा में पराली जलाने की घटनाएं कम हुई हैं। किसानों से पराली लेकर ग्राम प्रधान द्वारा गौशालाओं तक पहुंचाया जा रहा है। एडीए इंजीनियर सुधांशु शर्मा ने दावा किया कि रिंग रोड फेस-1 पर प्रदूषण रोकने के लिए स्वीपिंग कराई जा रही है। नगर निगम पर्यावरण अभियंता पंकज भूषण ने बताया कि निगम पांच टन प्रतिदिन क्षमता के सीएंडडी वेस्ट साइट का निर्माण करा रहा है। 1000 किलो लीटर क्षमता के जलाशय को बना रहे हैं, जिसमें एसटीपी से निकला पानी भरा जाएगा। भविष्य में इसी पानी का उपयोग छिड़काव और अन्य गतिविधियों में किया जाएगा। धूल कणों का उत्सर्जन रोकने के लिए कच्ची सड़कों पर टाइल्स लगाए जा रहे हैं। कार्यक्रम में टीटीजेड प्राधिकरण सदस्य उमेश शर्मा, यूपीपीसीबी के डॉ. विश्वनाथ शर्मा आदि मौजूद रहे।
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