वह एक बेटी है। उसने अपने पिता को नया जीवन दिया है। अपना लीवर देकर। वह भी 20 साल की उम्र में। इतना ही नहीं, उसने बेटियों के प्रति नकारात्मक रुख रखने वालों को आईना भी दिखाया है। यह मिसाल पेश की है मेरठ कॉलेज से बीएससी कर रही प्रिया ने।
इतना बड़ा दिल दिखाकर प्रिया अपने पिता के लिए फरिश्ता साबित हुई है। रामपुर निवासी हरीश चौधरी लंबे समय से लीवर की बीमारी से पीड़ित थे। संक्रमण फैलने से लीवर डैमेज हो चुका था। डॉक्टरों ने उनके जीवित रहने के लिए लीवर ट्रांसप्लांट ही अंतिम विकल्प बताया।
पिता को बचाने के लिए छोटी बेटी प्रिया आगे आई। उसने अपना 50 फीसदी लीवर पिता को दिया। जून-2013 में अपोलो दिल्ली में उसका आधा लीवर पिता को प्रत्यारोपित किया गया। जून में ही प्रिया की बीएससी की मुख्य परीक्षाएं थीं। पिता के इलाज के कारण उसे मुख्य परीक्षा से वंचित होना पड़ा। लेकिन होनहार बेटी के इस काम को देखते हुए विश्वविद्यालय की परीक्षा समिति ने उसे बाद में मुख्य परीक्षाएं देने की इजाजत दे दी।
बेटियां हैं घर का चिराग
हरीश के दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी एमकॉम कर रही है। छोटी बेटी प्रिया जागृति विहार में अपने नाना सुरेंद्र परसवाल के पास रहकर मेरठ डिग्री कॉलेज से बीएससी कर रही है। अब दोनों बेटियां मिलकर उनके ऑफिस की जिम्मेदारी भी संभाल रही हैं। हरीश कहते हैं, बेटियां घर का चिराग हैं। लोग उन्हें बोझ समझते हैं, लेकिन मुश्किल वक्त में वही साथ देती हैं। मुझे अपनी बेटियों पर गर्व है, जिनकी खातिर मुझे नया जीवन मिला। मेरी बेटियों ने मेरी सोच बदल दी है।
पिता से बढ़कर कुछ नहीं
प्रिया कहती है, परिवार से बढ़कर दुनिया में कुछ नहीं है। बचपन से मेरी इच्छा अपने परिवार के लिए कुछ अच्छा करने की थी, ताकि मेरे पैरेंट्स को कभी बेटे की कमी न खले। मैंने केवल बेटी होने का फर्ज निभाया है। जो हर बेटी को निभाना चाहिए।
बढ़ रहे हैं लीवर ट्रांसप्लांट के मामले
डॉ. मलय शर्मा, गैस्ट्रोलॉजिस्ट के मुताबिक लीवर ट्रांसप्लांटेशन के मामलों में वृद्धि हो रही है। इसकी प्रक्रिया भी गुर्दा प्रत्यारोपण की तरह होती है। मेदांता और अपोलो इसके बड़े सेंटर हैं। मेरठ में फिलहाल यह सुविधा नहीं है। एक स्वस्थ युवा भी अपना आधा लीवर ट्रांसप्लांट कर सकता है। प्रत्यारोपण के बाद डोनर और मरीज दोनों के लीवर तत्काल सामान्य रूप से काम करने लगते हैं। लीवर ट्रांसप्लांट ब्लड रिलेशन में ही हो सकता है।