लखनऊ। सचिवालय में कुछ अफसर जालसाजी का गोरखधंधा चला रहे हैं। हाल ही नौकरी दिलाने व ‘सचिवालय पास’ बनवाने की जालसाजी के मामले का पुलिस पटाक्षेप भी नहीं कर पाई थी कि सचिवालय अफसरों के एक और कारनामे का खुलासा हुआ है। पूर्व मंत्री के निजी सचिव व अपर सचिव ने जालसाजों की मदद से सूबे के कई जनपदों के 42 बेरोजगारों से करीब दो करोड़ रुपये हड़प लिए। गुरुवार सुबह पुलिस ने हाई प्रोफाइल जालसाजों के गैंग का भंडाफोड़ कर एक पूर्व मंत्री के करीबी को दबोच लिया। पुलिस ने जालसाज से फर्जी दस्तावेज भी बरामद किए हैं। फर्जीवाड़े में शामिल एक निजी सचिव सभापति के साथ संबद्ध बताया जा रहा है। पुलिस ने फर्जीवाड़े में शामिल सचिवालय के दोनों अफसरों से बंद कमरे में घंटों पूछताछ की। अफसरों पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस सुबूत जुटा रही है। पुलिस की मानें तो जालसाजों ने बेरोजगारों को फंसाने के लिए शासन से एक फर्जी चयन लिस्ट जारी कर दूर-दराज केस्कूलों के नियुक्ति पत्र भी दे दिए। सीओ दिनेश यादव के मुताबिक, मूल रूप से इटावा व हाल पता आलमबाग के बरहा कॉलोनी निवासी व फैब्रीक्रेटर्स कारीगर उमेश कुमार सिंह ने शिकायत की थी कि वर्ष 2010 में प्लॉट खरीदने के दौरान उसकी मुलाकात कृष्णानगर के आशाराम बापू रोड निवासी सुधीर यादव से हुई थी। उसने खुद को एक पूर्व मंत्री का खास बताकर नजदीकी बढ़ाई। इसके बाद नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक पूर्व मंत्री के करीबी व जौनपुर के निवड़िया निवासी मंशाराम उपाध्याय से मिलवाया। मंशाराम ने बताया माध्यमिक शिक्षा परिषद में लिपिक की भर्ती की जगह निकली है। प्रति व्यक्ति चार लाख रुपए देने होंगे। इस पर उमेश राजी हो गया और उसने अपनी पत्नी प्रीति सिंह, टूंडला के रविंदर सिंह, अनुराग व सुनील मिश्र की नियुक्ति के लिए 15 लाख रुपए दिए। इसके बाद मंशाराम व सुधीर ने उमेश की मुलाकात सचिवालय के आरसी मिश्र से कराई। आरसी मिश्र तत्कालीन ऊर्जा मंत्री के निजी सचिव थे। उसके बाद सभी अभ्यर्थियों को सचिवालय के पत्रांक संख्या 1/15 माध्यमिक शिक्षा चयन समिति के विज्ञापन संख्या 2567/रा/ल/2010-11 द्वारा सहायक लिपिक पद के लिए साक्षात्कार का पत्र मिला। 31 मार्च 2011 को दोपहर 12 बजे उन्हें एमएम कक्ष संख्या 951ख उप्र सचिवालय के गेट संख्या-9 में बुलाया गया। वहां तीनों जालसाजों ने सचिवालय में तैनात अपर सचिव जय किशोर द्विवेदी को नियुक्ति अफसर बताकर साक्षात्कार कराया। अभ्यर्थियों को कहा गया कि दो माह में नियुक्ति की सूचना दे दी जाएगी। दो माह बाद रविंदर के घर जौनपुर में अढ़नपुर के जमालापुर स्थित सरस्वती उमा विद्यालय का नियुक्ति पत्र आया। रविंदर स्कूल पहुंचे तो सुनील व अनुराग भी वहां मिले। दोनों ने बताया कि स्कूल तो सिर्फ आठवीं तक है। स्कूल के प्रिंसिपल ने भी नियुक्ति पत्र को फर्जी बताया। उसके बाद बेरोजगारों ने जालसाजों पर दबाव बनाया तो मंशाराम ने उन्हें शासन की ओर से जारी 42 लोगों की नियुक्ति सूची दी। इस सूची में सूबे के कई जनपदों के बेरोजगारों की तैनाती दिखाई गई थी। शक होने पर बेरोजगारों ने सूची की छानबीन की तो पता चला कि चयन सूची, नियुक्ति पत्र व साक्षात्कार आमंत्रण समेत सभी दस्तावेज फर्जी हैं। फर्जीवाड़े के खुलासे के बाद बेरोजगारों ने जालसाजों पर दबाव बनाया तो जालसाज करीब एक साल तक उन्हें टरकाते रहे। फिर, पूर्व मंत्री के करीबी मंशाराम उपाध्याय ने उमेश को 2 और 3 लाख रुपए का चेक दिया, जो बाउंस हो गया। उसकेबाद मंशाराम ने ढाई लाख रुपए नगद उमेश को लौटाए। पुलिस ने उमेश की तहरीर पर मामला दर्ज कर मंशाराम उपाध्याय को दबोच लिया। मंशाराम खुद को पूर्व ऊर्जा मंत्री का करीबी बताता था। पुलिस को मंशाराम से कई फर्जी दस्तावेज मिले हैं। पुलिस गिरफ्त में आए मंशाराम ने सचिवालय अफसरों के नाम कबूले। पुलिस ने फर्जीवाड़े में शामिल निजी सचिव आरसी मिश्र व जय किशोर द्विवेदी से लंबी पूछताछ की। बाद में उन्हें शहर के बाहर न जाने की हिदायत देकर छोड़ दिया गया। पुलिस दोनों आरोपियों पर शिकंजा कसने के लिए उनके खिलाफ सुबूत एकत्र कर रही है। आरसी मिश्र तत्कालीन पूर्व ऊर्जा मंत्री का निजी सचिव पद तैनात था। वर्तमान में वह सभापति का निजी सचिव है, जबकि सचिवालय में तैनात जय किशोर द्विवेदी भी एक मंत्री का निजी सचिव है। पुलिस ने आरोपियों पर धोखाधड़ी, धमकाने समेत संगीन धाराओं में मामला दर्ज किया है। सीओ हजरतगंज के मुताबिक, पकड़ा गया मंशाराम जौनपुर के निवड़िया थाने का हिस्ट्रीशीटर भी है। आरोपी पर जौनपुर में जालसाजी, चोरी समेत विभिन्न धाराओं में आधा दर्जन मामले दर्ज हैं। जालसाजी के मामले में मंशाराम को बाराबंकी पुलिस ने पकड़ा था। आठ महीने बाद हाल ही वह जेल से छूटकर आया था।
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समीक्षा अधिकारी बताकर जमाता था रौब ः पुलिस गिरफ्त में आया मंशाराम उपाध्याय खुद को सचिवालय का समीक्षा अधिकारी बताकर लोगों पर रौब जमाता था। उसके दरबार में अपनी समस्याएं लेकर आने वाले लोगों का तांता लगा रहता था। पुलिस की मानें तो चारबाग व हजरतगंज के होटल में मंशाराम का एक कमरा बुक रहता था, जहां वह जरूरतमंदों से मिलता था। मंशाराम के मंत्री, आईएएस, आईपीएस व कई पीसीएस अफसरों से करीबी रिश्ते हैं। सचिवालय में उसकी इंट्री धड़ल्ले से होती थी। उसका सचिवालय से वीवीआईपी ‘पास’ बना था। ठगी के शिकार बेरोजगारों की मानें तो मंशाराम के सचिवालय पहुंचते ही सुरक्षा गार्ड, चपरासी तथा बाबू सभी उसे हाथोंहाथ लेेते थे। वह लग्जरी वाहनों से घूमता था और बेरोगजारों को झांसे में फंसाने के लिए ठसक दिखाता था। कई मंत्री व अफसरों के घर उसकी बिना रोक-टोक इंट्री है।
दो साल से निजी सचिवों का गोरखध्ंाधा ः सचिवालय के निजी सचिवों की जालसाजी का यह गोरखध्ंाधा दो साल से चल रहा है। सूबे के कई जनपदों में नौकरी दिलाने वाले दलाल इनके संपर्क में हैं। इन्हीं की मदद से सचिवालय अफसरों ने 42 बेरोजगारों से चार-चार लाख रुपए के हिसाब से एक करोड़ 68 लाख रुपए वसूले। बेरोजगारों को विश्वास दिलाने के लिए अफसरों ने चयन समिति की ओर से नियुक्ति सूची और नियुक्ति पत्र जारी कर दिया। बेरोजगारों को सचिवालय में इंट्री कराने के लिए ‘पास’ भी यही अफसर बनवाते थे। पात्र अभ्यर्थी को वे अपने कमरे में बैठाते थे और इनका साक्षात्कार सचिवालय के सरकारी कमरे में लिया जाता था। बेरोजगारों को सेवा टहल के लिए घर भी बुलाते थे। ठगी के शिकार उमेश सिंह की मानें तो निजी सचिव आरसी मिश्र उसे महीनों पत्नी के साथ अमराई निर्माणाधीन स्कूल भेजता था। उमेश अपनी कार से मैडम को ले जाता और लाता था।
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शासन से जारी की कथित चयनित सूची ः जालसाजों ने शासन से जारी कथित सूची में लिपिक पद पर सुग्गल विश्वकर्मा को हरदोई, भागीरथी पटेल को बदायूं, सुनील प्रजापति को एटा, शिव प्रसाद निषाद को सिद्धार्थनगर, कन्हैयालाल पटेल को कुशीनगर, सूर्यकांत मिश्र को जौनपुर, धर्मेंद्र कुमार को इटावा, विपिन कुमार दूबे को वाराणसी, महेश कुमार को मथुरा, शौकत अली को गोंडा, झुन्नूराम गौड को बहराइच, बबिता मिश्रा को वाराणसी, प्रमोद कुमार यादव को लखनऊ, राजेंद्र को खीरी, रामराज तिवारी को उन्नाव, विनय तिवारी को कानपुर देहात, अनिल शुक्ला को इलाहाबाद, इंजामुल हक को अलीगढ़, अब्दुल कय्यूम को अलीगढ़, संदीप दूबे को वाराणसी, शशितोष उपाध्याय को सुल्तानपुर, रंजना यादव को जालौन, ऋषिकांत चौहान को जालौन, अंकित कुमार सिंह को जौनपुर, कल्पना चौबे को वाराणसी, जितेश मिश्र को वाराणसी, फरीदुल हक को एटा, मनीष पांडेय को सुल्तानपुर, आनंद दूबे को वाराणसी, विजय कांत चौरसिया को मिर्जापुर, बाबूलाल चौहान को प्रतापगढ़, बालकिशन को सोनभद्र, नेबूलाल को बांदा, संदीप दूबे को वाराणसी, पुष्पराज को कांशीरामनगर एटा, राम नरेश यादव को कन्नौज, अरुण कुमार को कन्नौज, कृष्ण कांत को मुरादाबाद, रमाशंकर को फीरोजाबाद, प्रीति को लखनऊ व रविंदर प्रताप सिंह को टूंडला में तैनाती दी। सूत्रों की मानें तो यह सूची तो सिर्फ उन लोगों की है, जिन्होंने काफी समय पहले पैसे दिए थे और पैसे वापस मांग रहे थे। इनके अलावा तमाम ऐसे लोग भी हैं, जिनके नाम सूची में नहीं हैं।
बैंक एकाउंट खुलवाया और दो महीने का वेतन भी दिया ः हाई-प्रोफाइल जालसाजों ने बेरोजगारों को झांसे में लेने के लिए जौनपुर के एक राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खुलवाया और दो महीने वेतन भी दिया, मगर उसके बाद खाते में वेतन आने का इंतजार बेरोजगार आज तक कर रहे हैं। जालसाज पीड़ित अनुराग (खाता संख्या 908745) व सुनील मिश्र (खाता संख्या 908746) समेत 14 लोगों का जौनपुर के अढ़नपुर जमालापुर स्थित एक राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता खुलवाया। निर्धारित 13,300 रुपए दो माह उन्हें भेजा गया, मगर उसके बाद वेतन नहीं आया। पुलिस खाते की डिटेल खंगाल रही है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि वेतन के रुपए नगद जमा कराए गए या किसी खाते से ट्रांसफर किए गए।
दारुलशफा व पार्टी कार्यालय में भी होते थे साक्षात्कार ः पुलिस की मानें तो जालसाज दारुलशफा व राजनैतिक पार्टियों के दफ्तरों में भी कथित अभ्यर्थियों से साक्षात्कार लेते थे। पुलिस पड़ताल कर रही है कि जालसाजों का दारुलशफा व कौन-कौन से पार्टी कार्यालय में अड्डा है। पुलिस की मानें तो बाहर जनपदों से आए नेताओं के समर्थक राजधानी में यह गोरखधंधा चला रहे हैं।
आलीशान फार्म हाउस पर करते थे मौज ः पुलिस की मानें तो जालसाजी में शामिल एक निजी सचिव का फैजाबाद रोड फार्म हाउस व अमराई गांव में स्कूल बन रहा है। आलीशान फार्म हाउस में शानो-शौकत के सारे सामान मौजूद हैं। वीकेंड में अफसर अपने परिचितों और दोस्तों केे साथ मौज-मस्ती करने जाते थे। वहां देर रात तक शराब और कबाब का दौर चलता था।