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टूट रही उम्मीदों को एक फोन कॉल की दरकार

Fri, 21 Jun 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। एक फोन कॉल किसी की जिंदगी के लिए क्या मायने रखती है ये देखना है तो उन परिवारों से मिलिए जिनके अपने देवभूमि में आई आपदा के चलते लापता हैं। उम्मीदों के भारी बोझ को इस समय बस एक फोन कॉल का सहारा है। जिससे उन्हें अपनों की खैर खबर मिल जाए। बस इतना पता चल जाए कि उनके अपने सुरक्षित हैं। अमर उजाला ने गुरुवार को ऐसे परिवारों की मदद के लिए कुछ नंबर छापे थे। ताकि उत्तराखंड में लापता हुए राजधानी वालों के लिए कुछ मदद हो सके। दिन भर पीड़ित परिवार के घरवालों और रिश्तेदारों के फोन आते रहे। वे बस यही कह रहे थे कि इतना पता चल जाए कि वे लोग वहां मिल गए हैं। इन परिवारों की बेचैनी वाकई दर्द देने वाली है।
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लिस्ट में नाम, लेकिन नहीं चल रहा पता ः उत्तराखंड में आई आपदा के बाद हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। बचने वाले जिन लोगों का नाम लिस्ट में है उनका भी पता नहीं चल पा रहा है। लखनऊ के इंदिरानगर की 16 साल की धैर्या भी उनमें से एक है। धैर्या पिता धनंजय, मां सुनीता और भाई आदि समेत छह लोगों के साथ केदारनाथ की यात्रा पर निकली थी। 17 जून को शाम पांच बजकर सात मिनट पर उसके पिता धनंजय समेत अन्य ने मामा बृजेश श्रीवास्तव से फोन पर बात की थी। तब वे सभी रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ पर फंसे हुए थे। उसके बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। हादसे की खबर पाकर धैर्या के मामा बृजेश देहरादून पहुंच गए। बचने वालों की लिस्ट में उन्होंने धैर्या का नाम देखा लेकिन उसके बारे में कुछ पता नहीं चल पा रहा है कि आखिर वह कहां है? बाकी पांच लोगों की तो कोई खबर ही नहीं है। बृजेश मदद की तलाश में इधर उधर भटक रहे हैं। धनंजय का इंदिरानगर में यूनीवर्सल नाम से स्टोर है। इसके साथ ही कृति प्रकाशन के नाम से पब्लिकेशन हाउस है।

‘उम्मीद है मम्मी-पापा ठीक होंगे’ः राजाजीपुरम के स्टेशनरी शॉप संचालक संतोष कुमार रस्तोगी की मां हंसमुख देवी और पिता अयोध्या प्रसाद भी कई लोगों के साथ तीर्थयात्रा पर निकले थे। संतोष की शनिवार को माता-पिता से बात हुई थी। तब उन लोगों ने बताया था कि रामबाड़ा में सैकड़ों लोग फंसे हैं। संतोष कहते हैं कि वह नहीं जानते कि माता-पिता किस हाल में हैं? बस एक उम्मीद है कि वे ठीक होंगे और जल्द घर लौट आएंगे।
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‘इतवार से दद्दा ने फोन नहीं किया’ ः माल के काकराबाद निवासी रामस्वरूप यादव के दादाजी भैयालाल यादव केदारनाथ यात्रा पर गए थे। रामस्वरूप कहते हैं कि इतवार को दद्दा से बात हुई थी। उसके बाद से उनका फोन बंद है। कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। दद्दा के लिए पूरा परिवार चिंतित है। उनके साथ गए परिचितों में रामकुमार, रामकुमारी, बबलू, फिन्नी का भी पता नहीं है।

‘भैया पानी से बचने के लिए पहाड़ पर चढ़ गए थे ’ ः लखनऊ में एक फर्म में कार्यरत रमेश पांडेय के बड़े भाई राजेश उत्तराखंड में कंस्ट्रक्शन कंपनी में अधिकारी हैं। वह रुद्रपुर के पास चंद्रापुरा में लग रहे पावर प्लांट के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने मंगलवार को परिवार से बात की थी तो बताया था कि उनके क्षेत्र में बारिश बंद हो चुकी है, लेकिन पानी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में वह बचने के लिए निकले। लेकिन चट्टानें खिसकने की वजह से रास्ते बंद हो गए थे। बचने के लिए पहाड़ों पर चढ़ना ही एक विकल्प था। उन्होंने वही चुना। वह पहाड़ पर चढ़ गए। लेकिन उसके बाद से उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ। इंतजार है एक फोन कॉल कि जिससे उनके सुरक्षित होने की पुष्टि हो जाए। उनके बारे में पता करने के लिए कुछ परिजनों को रुद्रपुर भेजने की कोशिशें भी की जा रही हैं।

उत्तरकाशी के पास हैं हमारे घरवाले ः अमानीगंज निवासी व्यवसायी राकेश अवस्थी के फूफा शीतला प्रसाद अवस्थी व अन्य परिजन जगदंबा प्रसाद अवस्थी, संपूर्णा देवी, रामकुमारी, रामदेवी, उमाकांत और तीन अन्य लोग इस समय उत्तरकाशी में कहीं फंसे हैं। राकेश बताते हैं कि उनकी परिजनों से बात नहीं हुई है, लेकिन दूसरों से उनके फंसे होने की खबर मिली है। मड़ियाऊ के रहने वाले सभी रिश्तेदार यमुनोत्री और गंगोत्री के बीच में कहीं थे।

माल के ये परिवार बेहाल ः माल से सात श्रद्धालु केदारनाथ यात्रा के लिए निकले थे। ये सभी नागेश्वर जोशी के नेतृत्व में गए थे, जो अक्सर ऐसी यात्राओं का आयोजन करते हैं। बाजार गांव निवासी नागेश्वर पेशे से पंडित हैं और उनका परिवार उन पर निर्भर है। 15 जून को उनके बेटे श्याम जोशी का उनसे संपर्क हुआ था, तब वे सभी के साथ केदारनाथ में ही थे। इसके बाद बताया जाता है कि वे रामबाड़ा से गुजरने वाले थे और आशंका है कि वे वहीं कहीं फंसे हैं। उन्हीं के साथ 65 वर्षीय रामस्वरूप, उनकी पत्नी शीतला देवी भी गई हैं जो बजनिया गांव से हैं। बजनिया गांव की ही मुन्नी सिंह (70), अमर सिंह, उनकी पत्नी राजरानी व उनकी नातिन रामदेवी भी यात्रा में सदस्य हैं। जिनकी कोई खबर नहीं मिल रही है।
40 लोग रामबाड़ा में टीले पर फंसे
जुगौली, खरगापुर के मनमोहन मिश्रा बताते हैं उनके पिता नागेंद्र प्रसाद और मां मंजू सहित लखनऊ के करीब 40 लोग केदारनाथ जाने के दौरान फंस गए हैं। 16 जून को हुई बातचीत के मुताबिक वे लोग रामबाड़ा के पास एक टीले पर शरण लिए हुए हैं। उनके पास खाने को नहीं है। पीने का पानी भी नहीं मिल रहा है। यह सारी सूचना उन्हें उनके अलीगंज के एक बस ड्राइवर से मिली है। जिसका संपर्क वहां ड्राइवर से हो सका।

होटल ने चार गुना
गोसाईंगंज के मुकेश मिश्रा अपनी भांजियों चारू, रागिनी व मोंटू और 90 वर्षीय दादी गंगा देवी को लेकर चिंतित हैं। बुधवार सुबह उनका उनसे संपर्क हुआ था। उन लोगों ने बताया कि कैसे वे तीनों अपनी दादी को मुश्किल हालात में यमुनोत्री के पास जानकी चट्टी पर ले गईं। फिर वे लोग होटल बहुगुणा पहुंचे। यहां मदद करने के बजाए होटल वालों ने किराया 400 रुपए से बढ़ाकर 1,600 कर दिया है। प्रशासन से कोई मदद नहीं पहुंची है। तहसीलदार ने मदद के बजाए सलाह दी कि करीब 10 किमी चलकर ऐसे स्थान पर पहुंच सकते हैं, जहां से सहायता मिल जाएगी। लेकिन 90 वर्ष की गंगा देवी के लिए पहाड़ों पर दस किमी चलना लगभग असंभव है।

40 के समूह में तीन लापता
निजी फर्म में कार्यरत राजेश यादव बोले कि उनके मामा सुंदरलाल, कमला देवी, संतोष, सूरजपाल सिंह एक समूह के साथ केदारनाथ गए थे। उनके समूह के एक व्यक्ति से संपर्क हुआ तो उसने बुधवार को बताया कि करीब 35 से 40 लोग अभी भी फंसे हुए हैं। तीन लोग लापता हैं। लेकिन वे कौन हैं इसका पता नहीं चल पाया है। डर लगता है कि कहीं अपने ही न हों।

बच्चों संग फंसा परिवार
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पूर्व महामंत्री एसके मिश्र रिश्तेदार और उन्नाव में वकील गिरीश कुमार मिश्र 14 लोगों के साथ 7 जून को केदारनाथ गए थे। गिरीश की पत्नी पम्मी, दोनो बेटे हर्ष (4), राघव (5), बड़े भाई मदन मोहन मिश्र के ससुराल पक्ष के 10 लोग भी गए हैं। मंगलवार को फोन आया कि केदारनाथ के दर्शन कर लौट रहे हैं। इसके बाद से उनका कुछ पता नहीं चला है। बच्चों का क्या हाल है इसकी भी कोई सूचना नहीं मिल रही है।

कहीं से कोई खबर नहीं
अलीगंज निवासी छात्र गौरव श्रीवास्तव के पिता व एचएएल में सुपरवाइजर वीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव और मां अरुणा श्रीवास्तव 9 जून को यात्रा पर गए थे। शनिवार को उन्होंने केदारनाथ के दर्शन किए थे। उसके बाद मंगलवार को फोन आया कि वे नंद कुटिया में सेना के शिविर में हैं। दोबारा फोन किया तो शिविर के इंचार्ज ने बताया कि वो लोग यहां से निकल गए हैं। उसके बाद से अब तक उनका कोई पता नहीं चला है।

कट गया संपर्क
बंथरा के गुरौनी निवासी सुमन के पिता सूरज बली बस एजेंट हैं। वह आलमबाग के सात और चंद्रावल गांव के निवासी एक लोग के साथ दर्शन को गए थे। शनिवार दोपहर को मां रामा देवी के पास फोन आया कि वह लोग हरिद्वार में हैं। यहां बहुत बारिश हो रही है। उसके बाद से उस परिवार का कोई पता नहीं चला। फोन का संपर्क कटा हुआ है।

चार दिन से लोग परेशान
एक निजी पब्लिशिंग कंपनी में कार्यरत व कानपुर रोड निवासी गीता नायर के परिवार के 11 सदस्य केदारनाथ के दर्शन को गए थे। परिवारीजनों ने 17 जून तड़के गीता नायर को यह बताया कि केदारनाथ से केवल 20 किलोमीटर दूर रह गए हैं। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चला। गीता की बड़ी ननद पदमा देवी, उनके पति विक्रम, विक्रम के भाई विजय लक्ष्मी, उनकी बेटी रश्मि, छोटी ननद व लता नायर, उनका बेटा आकाश पी कुमार, बेटी आशा पी कुमार, रिश्तेदार शिव शंकर, मालती नायर, इनकी बेटी श्रुति शंकर और बेटा सुमित शंकर का कुछ पता नहीं चल पा रहा है।

पुल बहा, आने का पता नहीं
डालीगंज मुंशीगंज निवासी अनुराग साहू ने बताया कि उनके पड़ोस में रहने वाले डालीगंज के सर्राफ सुशील जायसवाल, पत्नी जानकी, बेटी श्रेयांश और नेहा के साथ सात जून को रवाना हुए थे। उनके साथ डालीगंज सर्राफ एसोसिएशन के अध्यक्ष राम प्रकाश गुप्ता, त्रिवेणीनगर के सर्राफ विजय और शैलेश गुप्ता का परिवार भी साथ में है। केदारनाथ के दर्शन के बाद यह परिवार बीच रास्ते फंस गया है। हर्शिल के झाला कस्बा के एक घर में इन्होंने शरण ले रखी है। यहां बचाव की टीम अब तक पहुंची। सेना के जवान उनका नाम लिखकर वापस चले गए हैं। बुधवार को बात हुई तो सुशील ने यह बताया कि दो किलोमीटर आगे पुल बह गया है। इसलिए रास्ता बंद है। कब निकलेंगे यह नहीं पता।

संपर्क हुआ तो खिले चेहरे
इस बीच कुछ परिवारों का खतरे में फंसे अपने रिश्तेदारों से संपर्क हो गया है। बालागंज के रहने वाले गोपाल तिवारी ने बताया कि उनके माता-पिता पुष्पा और केके तिवारी से 14 जून से संपर्क नहीं हो पा रहा था। वे उनके केदारनाथ पहुंचने के बाद से चिंतित थे, लेकिन भगवान शिव ने शायद उन्हें प्रलय से बचाया और वे गुप्तकाशी के पास पहुंचकर अब लौट रहे हैं। इसी तरह अंबेडकरनगर के मूल निवासी जीतेंद्र मिश्रा के पिता श्रीराम मिश्रा व निर्मला मिश्रा भी 16 जून से गुप्त काशी में फंस गए थे, जहां से वे वैद्यनाथ मंदिर में शरण ले सके और मौका मिलते ही उन्हाेंने घर में संपर्क किया।

मिल गया परिवार
मुरलीनगर में रहने वाले परचून के दुकानदार विकास अपने भाई विनय और मौसी के बेटे राहुल के साथ 9 जून को केदारनाथ दर्शन को गए थे। पिछले कई दिन से कोई फोन नहीं आया तो लोग परेशान हो गए। गुरुवार दोपहर एक बजे घर पर फोन आया कि वह लोग हरिद्वार आ गए हैं। इसके बाद घरवालों ने राहत की सांस ली।
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