लखनऊ। अंग्रेजी अब भी उच्च वर्ग की भाषा बनी हुई है। निम्न वर्ग और पिछड़े इलाकों में अब भी इसे लेकर जागरूकता का अभाव है। एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर में ‘वैश्विक संदर्भ में अंग्रेजी भाषा शिक्षण : कौन, क्या, कैसे’ विषय पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ये विचार भाषा विशेषज्ञों ने रखे। क्षेत्रीय अंाग्ल भाषा कार्यालय, यूएस दूतावास (आरईएलओ), भारतीय आंग्ल भाषा शिक्षक संघ, ब्रिटिश काउंसिल और एमिटी विश्वविद्यालय लखनऊ परिसर के संयुक्त तत्वावधान में यह दो दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया है।
मुख्य अतिथि मुख्य सचिव (प्राविधिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश) राजीव कपूर ने कहा कि आज के दौर में अंग्रेजी भाषा का ज्ञान जरूरत बन गया है। अंग्रेजी को अपने रोज के व्यवहार में प्रयोग करने पर इसमें पारंगत हुआ जा सकता है। मुख्य वक्ता इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेज यूनिवर्सिटी, लखनऊ के निदेशक राज एन बख्शी ने कहा कि आज दुनियाभर में मास मीडिया और लिखित संवादों के लिए अंग्रेजी एक लोकप्रिय भाषा के रूप में स्थापित हो रही है। वहीं, भारत में इसकी पहुंच उच्च जातियों तक ही ज्यादा है। पिछड़ी जातियों में इसके प्रति जागरूकता का आभाव है।
इस दौरान ‘बुक ऑफ एब्सट्रैक्ट’ का विमोचन हुआ। प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों की किताबों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। सम्मेलन के पहले दिन आरईएलओ की डाइना मिलर और डेनियल रिनगोल्ड, ब्रिटिश काउंसिल की ऐमी लाइट फुट और ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ इंग्लिश टीचर्स के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अमोल पड़वाड, जेएनयू के भाषाविद् प्रो. वैशाना नारंग, कैम्ब्रिज इंग्लिश लैग्वेज असेसमेंट की सहायक निदेशिका एंजिला फ्रेंच और एमिटी विवि के शिक्षकों ने प्रशिक्षण दिया। सम्मेलन में 150 से भी ज्यादा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय भाषाविद्, भाषा विज्ञानी, प्रशिक्षक, अध्यापक, नीतिनिर्धारक और शोधार्थी हिस्सा ले रहे हैं। इसके पूर्व मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता ने दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का उद्घाटन किया। एमिटी विवि के वीसी सेवानिवृत्त मेजर जनरल केके ओहरी ने स्मृति चिह्न भेंटकर अतिथियों का स्वागत किया।