लखनऊ। 64,506 शोहदे 1090 के राडार पर हैं। ये 64,506 वे हैं जिन्होंने कभी न कभी किसी महिला से छेड़छाड़ की है और इनकी शिकायत वीमेन पावर लाइन पर की गई है लेकिन वहां से उन्हें सिर्फ चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था। इन रजिस्टर्ड शोहदों को एक अलर्ट एसएमएस भेजा जाएगा, अगर फिर शिकायत मिली तो सख्त कार्रवाई होगी। इसके साथ ही उन पीड़िताओं को भी संदेश भेजा जाएगा कि अगर उन्हें कोई परेशानी हो तो वह उसे वीमेन पावर लाइन से साझा करें।
पिछले साल 15 नवंबर को वीमेन पावर लाइन 1090 की शुरुआत के साथ ही शिकायती नंबरों का डाटा तैयार किया जाने लगा था। छह माह के दौरान 64,506 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। इसमें घरेलू हिंसा, स्कूलों व कोचिंग संस्थानों के पास होने वाली छेड़खानी और सोशल नेटवर्किंग साइट्स व साइबर क्राइम के मामले भी शामिल हैं। अभी तक 50 से ज्यादा शोहदों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। शेष को समझा बुझाकर छोड़ दिया गया। साथ ही उन्हें ताकीद की गई थी कि वे गलती न दोहराएं। चेतावनी के बाद भी आरोपी पुरानी हरकतें न दोहराएं इसलिए वीमेन पावर लाइन की तरफ से उन सभी को एसएमएस के जरिए चेतावनी भेजी जा रही है। ताकि वे मुगालते में न रहें कि पुलिस उन्हें भूल गई है। डीआईजी नवनीत सिकेरा ने इन सभी शिकायतों में सामने आए आरोपियों का डाटा तैयार कराया है। आरोपियों को भेजे जाने वाले चेतावनी संदेश में लिखा होगा कि शिकायत मिलने के बाद आप पर नजर रखी जा रही है। अगर आपने गलती दोहराई तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
राजधानी ही सबसे असुरक्षित
वीमेन पावर लाइन में छह माह के दौरान कुल 1,94,171 कॉल आईं। इनमें से 64506 मामलों में शिकायतें दर्ज की गईं। बाकी कॉल्स कॉल सेंटर संबंधी जानकारी, घरेलू हिंसा व अन्य मामलों की थीं। सबसे ज्यादा फोन कॉल्स (40286) राजधानी लखनऊ से आईं। इनमें से 12862 दर्ज की गईं। शिकायत करने वालों में से ज्यादातर की उम्र 16 से 25 वर्ष के बीच थी। यानि राजधानी में लड़कियां और युवतियां सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं और यहां हर माह करीब 2200 से लड़कियां और युवतियां छेड़खानी का शिकार बन रही हैं।
जल्द शुरू होंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम
लखनऊ। वीमेन पावर लाइन सेंटर में साल भर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित होंगे। इसके लिए वहां विशेष कांफ्रेंस रूम तैयार किया गया है। खासतौर से महिला अपराध से जुड़े मामलों में विशेष संवेदनशीलता बरतने के लिए यहां प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए समय-समय पर न्यायाधीशों, वकीलों, पुलिस व मीडियाकर्मियों समेत तमाम दूसरी सामाजिक संस्थाओं के लोगों को बुलाकर प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। इस संबंध में जेटीआई, बॉर कौंसिल और दूसरी संस्थाओं से बात चल रही है। जल्द ही ये प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होंगे।
चेतावनी संदेश को भेजने से कई फायदे होंगे। पहले तो आरोपियों को यह पता चल जाएगा कि पुलिस उन पर नजर रखे हुए है। दूसरा उन सभी के खिलाफ अगली शिकायत पर कोर्ट में कार्रवाई कराना भी आसान हो जाएगा। क्योंकि यह चेतावनी उनके खिलाफ अहम साक्ष्य होगा कि उन्हें संदेश भेजकर आगाह किया गया था। - नवनीत सिकेरा, डीआईजी रेंज