लखनऊ। जिंदगी से हताश 11वीं के छात्र-छात्रा ने फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। सूचना पर पुलिस ने दोनों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। बकौल पुलिस दोनों आरएलबी स्कूल के स्टूडेंट थे। हालांकि इनकीं शाखाएं अलग-अलग थीं। दोनों के पास से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पुलिस परिवार वालों से पूछताछ कर रही है। पुलिस के मुताबिक, गाजीपुर के सेक्टर-21 निवासी स्वदेश दीक्षित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। स्वेदश की बड़ी बेटी पंजाब में बीटेक कर रही है, जबकि छोटी बेटी साक्षी दीक्षित (15) रानी लक्ष्मी बाई स्कूल के इंदिरानगर सेक्टर-सी शाखा में ग्यारहवीं की छात्रा थी। स्वदेश की पत्नी सीतापुर अपने भतीजे के घर वैवाहिक समारोह में शामिल होने गई हैं। पिता रोज की तरह सुबह ड्यूटी पर चले गए। दोपहर करीब दो बजे साक्षी स्कूल से घर आई और किराएदार के घर से चाभी लेकर ऊपर अपने कमरे में चली गई। उसने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। इस बीच, साक्षी ने किराएदार के मोबाइल से अपनी मां से बात भी की। उसके बाद वह घर से नहीं निकली। शाम को पिता दफ्तर से लौटे तो दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई हरकत नहीं हुई। किराएदार की मदद से उन्होंने दरवाजे की कुंडी तोड़ी। अंदर का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। साक्षी फंदे से लटक रही थी। सूचना पर पुलिस ने शव को नीचे उतारा।
इस घटना को कुछ घंटे बीते थे कि इंदिरानगर थाना क्षेत्र अंतगर्त सेक्टर-9 में रानी लक्ष्मी बाई स्कूल के सेक्टर-14 शाखा के ग्यारहवीं के छात्र प्रांजल कुमार मीना (15) ने फांसी लगा ली। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को नीचे उतारा। यहां से भी पुलिस को कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की है। प्रांजल सेक्टर-9 निवासी व बिजली विभाग में जेई जेनू राम मीना का बेटा था। जेनू राम इंदिरानगर पावर हाउस में तैनात हैं। पुलिस की मानें तो जेनू राम की पत्नी दोपहर में पड़ोस में गई थी, जबकि वह ड्यूटी पर थे। अपराह्न प्रांजल स्कूल से घर लौटा और पड़ोस में गई मां से चाभी मांगी फिर अपने कमरे में चला गया। थोड़ी देर बाद जब मां घर आई तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। उन्होंने आवाज लगाई, मगर कोई हरकत नहीं हुई। सूचना पर पुलिस ने दरवाजा खोला। प्रांजल ने खुदकुशी क्यों की इसका पता नहीं चल पाया है। जेनू राम के एक बेटा राजू व बेटी प्रीति और हैं।
मैं जिंदगी से बहुत परेशान...
लखनऊ। पुलिस के अनुसार साक्षी के कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। हालांकि उसके बैग से एक किताब मिली है, जिसमें एक बच्ची की पेटिंग बनी थी। पेटिंग में फर्श पर बैठी एक बच्ची की आंखों से आंसू टपक रहे थे। उस पर अंग्रेजी में लिखा था, ‘मैं जिंदगी से बहुत परेशान हूं, मुझे अब जीने की चाह नहीं रही।’ पुलिस पेटिंग कब्जे में लेकर जांच कर रही है।
दोनों घरों में मचा कोहराम
छात्रा-छात्र की मौत से दोनों घरों में कोहराम मच गया। कम उम्र बच्चों केखोने के गम से उनके माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। सूचना पर रिश्तेदार व मोहल्ले के लोग भी जमा हो गए। हर रोने चिल्लाने की आवाजें आ रही थी। दोनों क मौत से उनके जानने वाले स्तब्ध हैं। सभी उनकी तारीफ कर रहे थे। मोहल्ले वालों ने ढांढस बंधाया और उन्हें सहारा दिया।