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पुलिस के खौफ से किसान ने लगाई फांसी

Fri, 03 May 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। गोसाईगंज के खुरखुंदापुर गांव में बुधवार को पुलिस के खौफ से एक किसान ने फांसी लगा मौत को गले लगा लिया। गांव के ही एक व्यक्ति ने उसपर अपनी पत्नी से संबंध का आरोप लगाते हुए पंद्रह हजार रुपये व पांच किलो चांदी हड़प लेने की पुलिस से शिकायत की थी। इसको लेकर गोसाईगंज थाने के दो सिपाही उसके परिवार पर उसे चौकी भेजने का दबाव बना रहे थे। किसान की खुदकुशी करने की खबर लगते ही दोनों सिपाहियों के होश उड़ गए और बिना बुलाए मौके पर पहुंचकर शव नीचे उतारा और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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गोसाईगंज खुरखुंदापुर के मजरा महमूदपुर निवासी किसान दर्शन का बेटा जगदीश कुमार (40) काम में पिता का हाथ बंटाता था। पिता दर्शन के मुताबिक, मंगलवार को गोसाईंगंज के इंदिरा डैम पुलिस चौकी से दो सिपाही गांव आए। सिपाहियों ने बताया कि गांव के ही एक शख्स ने शिकायत की है कि जगदीश का उसकी पत्नी से संबंध है और उसने उससे पंद्रह हजार रुपये नगदी और पांच किलो चांदी हड़प ली है। पुलिसकर्मियों ने उसे चौकी भेजने के लिए दबाव बनाया। पिता के मुताबिक जब उन्होंने घर लौटने पर जगदीश से जानकारी की तो उसने बताया था कि बीते शनिवार को वह साइकिल से तरियापुर जा रहा था। रास्ते में गांव की ही एक महिला नशे की हालत में मिली। वह अपने जीजा के घर छोड़ने की जिद कर रही थी। उसकी हालत देखकर वह उसे वहां छोड़ आया था। इसको लेकर उसका पति गुस्साया था। उसके पति को उसने महिला को वहां छोड़ने के बाबत सफाई दी तो उसने जेल भिजवाने की चेतावनी दी। इससे वह परेशान था। पिता के मुताबिक पुलिस के धमकाने से जगदीश इतना खौफ में था कि वह घर से निकल नहीं रहा था। बुधवार को फिर उसे पुलिस चौकी भेजने के लिए धमकाने से डरे जगदीश ने फांसी लगा ली। मायके आई बहन बसंती ने घर सामने पुराने मकान में उसे फंदे से लटकते देखा। जगदीश की खुदकुशी की खबर सुनकर पुलिस चौकी के दो सिपाही बगैर किसी सूचना के आ गए और शव उतारा। मृतक की मां दुलारा का आरोप है कि सिपाहियों ने मुंह बंद रखने की धमकी दी। बूढ़े मां-बाप बेटे की मौत को लेकर अफसरों से शिकायत करने की बात कही है।

इज्जत जाने की डर से था सहमा ः ग्रामीणों की मानें तो जगदीश अच्छे स्वभाव का था। महिला से संबंधों को लेकर लगे आरोपों से वह बुरी तरह आहत था। वहीं ग्रामीण महिला के नशे में होने की की पुष्टि कर रहे हैं।
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बुढ़ापे की लाठी था जगदीश ः जगदीश अपने माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा था। उनका रो-रोकर बुरा हाल है। बेटे की मौत के बाद उनके घर में तीन जून से खाना नहीं पका। बहन बसंती भी परेशान है। घर वालों ने पोस्टमार्टम के बाद उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
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