लखनऊ। गैस एजेंसियों की मनमानी से परेशान घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को जल्द ही मनचाही गैस कंपनी व एजेंसी चुनने का मौका मिलेगा। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने बहुप्रतीक्षित गैस नंबर पोर्टबिलिटी सेवा शुरू करने को हरी झंडी दिखा दी है। शुरूआती दौर में बतौर पायलेट प्रोजेक्ट देश के चुनिन्दा 29 बड़े शहरों में इस सेवा को लागू किया जाएगा। इसकी सफलता के आकलन के आधार पर ही अगले चरण में इस सेवा को देश व प्रदेश के अन्य शहरों में लागू किया जाएगा। प्रदेश में जीएनपी सेवा के लिए राजधानी लखनऊ व कानपुर शहर को बतौर पायलेट प्रोजेक्ट चुना गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक महीने में गैस नंबर पोर्टबिलिटी सेवा को इन दोनों शहरों में शुरू किए जाने के संबंध में तीनों प्रमुख तेल कंपनियों के अधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देशित किया है। जीएनपी सेवा लागू हो जाने के बाद घरेलू गैस उपभोक्ता मनचाही गैस कंपनी व एजेंसी को सेवा की गुणवत्ता के आधार पर खुद ही चुन सकेंगे। इससे गैस एजेंसियों की मनमानी झेल रहे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी। घरेलू एलपीजी पर सब्सिडीयुक्त व्यवस्था के बाद उपभोक्ता को गैस एजेंसियों के स्तर से वितरण में तमाम तरह की परेशानी उठानी पड़ रही है। डीलरों की मनमानी की शिकायतों के बाद भी न तो तेल कंपनियों और न ही प्रशासन के स्तर पर कोई कार्रवाई होती है। घरेलू एलपीजी में गैस नंबर पोर्टेबिलिटी सेवा शुरू किए जाने से जहां उपभोक्ताओं को इस परेशानी से छुटकारा मिलेगा, वहीं गैस कंपनियों व एजेंसियों पर भी बेहतर कस्टमर सेवा मुहैया कराने का दबाव बनेगा।
29 शहरों में शुरू होगी जीएनपी ः पेट्रोलियम मंत्रालय ने पहले चरण में देश के 29 प्रमुख शहरों के घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं को गैस नंबर पोर्टबिलिटी की सेवा मुहैया कराने के लिए चुना है। मंत्रालय के सूत्र बताते हैं कि इसके तहत उत्तर प्रदेश में लखनऊ व कानपुर, उत्तराखंड में देहरादून, पंजाब में चंडीगढ़ व लुधियाना, हरियाणा में फरीदाबाद, नई दिल्ली, राजस्थान में जयपुर, महाराष्ट्र में मुंबई, पूना व नागपुर, उड़ीसा में विशाखापट्नम, गुजरात में अहमदाबाद, झारखंड में जमशेदपुर व रांची, कर्नाटक में बंगलुरू व हुगली, केरल में कोच्चि व त्रिवेन्द्रम और मध्यप्रदेश में भोपाल व इंदौर शहर प्रमुख तौर पर शामिल हैं।
बस एक एसएमएस से छुटकारा ः इस व्यवस्था के लागू हो जाने के बाद गैस उपभोक्ता को जीएनपी सेवा के लिए केंद्रीय मंत्रालय की मंजूरी से जारी टोल फ्री नंबर पर बस एक एसएमएस करना होगा। इसके बाद बिना कंज्यूमर गैस नंबर बदले तेल कंपनियां उपभोक्ता को उसकी मनपसंद गैस कंपनी व डीलर की सेवा से संबद्ध कर देंगी। तेल कंपनियों से जुड़े आला अधिकारी बताते हैं कि केवाईसी सत्यापन के बाद तीनों तेल कंपनियों के लिए तैयार किए गए सॉफ्टवेयर में पहले से ही जीएनपी सेवा का विकल्प तैयार करके प्रोग्राम की फीडिंग हुई है। जीएनपी का एसएमएस सीधे वर्तमान सेवा देने वाली कंपनी के पास पहुंचेगा। उपभोक्ता की इच्छा के आधार पर उसके द्वारा चुनी गई गैस कंपनी अथवा एजेंसी को इस बदलाव के बारे में सूचित कर सॉफ्टवेयर फीडिंग में बदलाव के बाद जीएनपी सेवा स्वीकृति का संदेश संबंधित कस्टमर को एसएमएस से दिया जाएगा। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अधिकतम सात दिन का समय तय किया गया है।
जीएनपी की घोषणा 15 मई तक ः भारत पेट्रोलियम से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि एलपीजी पोर्टेबिलिटी को लागू किए जाने की टेस्टिंग रिपोर्ट पॉजटिव आने के बाद ही तेल कंपनियों को इसे देश के 29 प्रमुख शहरों में लागू करने का निर्देश दिया गया है। इंडेन कंपनी के एक जिम्मेदार अधिकारी की मानें तो 15 मई से इस सेवा को दोनों शहरों में लागू किए जाने की औपचारिक घोषणा संभव है। मंत्रालय से तेल कंपनियों को जारी पत्र के बाद इंडेन, एचपी व बीपी कंपनियों ने जीएनपी सेवा के लिए आपसी स्तर पर सामंजस्य बनाने व चुने गए शहरों में कलस्टर जोन तैयार कर उपभोक्ता के गैस नंबर से जुड़े अभिलेखीय प्रपत्रों को अपडेट कर स्थानांतरण योग्य बनाने की तैयारी भी शुरू कर दी है।