लखनऊ। राजधानी के 17,000 से अधिक नए कनेक्शन धारकों को बिजली मीटर की दरकार है। इनके घरों में बिना मीटर के ही उजाला हो रहा है। बिजली काटो अभियान के अल्टीमेटम से ऐसे कनेक्शन धारकों में खलबली मच गई है। ये लोग नए कनेक्शन का सही बिल जमा करना चाहते हैं, लेकिन बिना मीटर के ऐसा संभव नहीं है। दरअसल, अवर अभियंता इन्हें कनेक्शन देकर मीटर लगाना ही भूल गए। गांवों को छोड़ दिया जाए तो शहरी इलाकों में बिना मीटर बिजली जलने से करोड़ों रुपए के राजस्व की क्षति हो रही है।
नवविकसित कॉलोनियों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में बिन मीटर वाले कनेक्शनों की भरमार है। अधिकारियों के अनुसार नवसृजित खंड बीकेटी में 8000, सेस (कोऑपरेटिव इलेक्ट्रिक सप्लाई सोसाइटी) एक मेें 2500, सेस दो में 5700 और शहरी कॉलोनियों में 800 से अधिक बिना मीटर के बिजली कनेक्शन हैं। हालांकि लेसा के सरकारी रिकॉर्ड में फरवरी 2013 में 2200 ही ऐसे कनेक्शन दर्ज हैं। सेस एक एवं दो को छोड़कर अन्य इलाकों में 24 घंटे बिजली आपूर्ति होती है। इसके कारण उपभोक्ता बिजली तो मनमाने तरीके से उपभोग कर रहे, लेकिन बिल 120 रुपए महीने के ही दे रहे हैं।
यहां पर कनेक्शन
ऐसे कनेक्शन सेस खंड एक के बंथरा, सरोजनीनगर, गोसाईंगंज, मोहनलालगंज, निगोहां, सिसेंडी, हरौनी सेस खंड दो के मोहान रोड, दुबग्गा, काकोरी, मलिहाबाद, माल, रहीमाबाद, सीतापुर रोड, छठे मील, कुर्सी रोड, बीकेटी, इटौंजा, चिनहट, अमराई, लौलाई, भरवारा, फजुल्लागंज, गौरभीट, भरतनगर, मड़ियांव, तेलीबाग, उतरेठिया, ठाकुरगंज, बालागंज, एकता नगर, सरफराजगंज और रस्तोगीनगर में हैं।
महीने में 120 रुपए का बिल
विद्युत वितरण खंड बीकेटी के अधिशासी अभियंता राम प्रकाश ने बताया कि उनके कार्यकाल में 3500 से अधिक कनेक्शनों पर मीटर लगाया जा चुका है। वर्तमान में 8000 कनेक्शनों पर मीटर लगना बाकी है। इन पर भी मीटर लगाने का सिलसिला जारी है। उन्होंने कहा कि खंडीय क्षेत्र में जो कनेक्शन बिना मीटर के चल रहे हैं, उनके बिल डायरेक्ट सप्लाई के तहत असेसमेंट यूनिट के बन रहे हैं। घरेलू कनेक्शन के एक किलोवाट विद्युत लोड पर 120 रुपए प्रति महीने के रेट से बिल बनाकर वसूले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि बीकेटी में बिना मीटर के वाणिज्यिक कनेक्शन नहीं हैं।
क्षेत्र कनेक्शन
बीकेटी 8000
सेस एक 5700
सेस दो 2500
लेसा में 800
वर्जन
नए बिजली मीटरों का अभाव खत्म हो चुका है। औसतन रोजाना 400 कनेक्शनों पर मीटर लग रहे हैं। इन मीटरों के लगने से राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
एपी मिश्रा, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम, लखनऊ