लखनऊ। राजधानी में सोमवार रात जाली नोटों के एक सौदागर को आलमबाग पुलिस व एसओजी ने दबोच लिया, जबकि गैंग का सरगना मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में दबिश दे रही है। पकड़ा गया तस्कर पीआरडी (प्रांतीय रक्षक दल) जवान रह चुका है और वह खुद नोट छापता था। उसके कब्जे से सौ रुपए के जाली नोटों की पांच गड्डियां, 1000 के नौ नोट, एक कलर प्रिंटर व कुछ कागजात बरामद किए गए हैं।
पुलिस के मुताबिक, आलमबाग के इंस्पेक्टर ऋषिकेश यादव व एसओजी प्रभारी नागेंद्र चौबे, दरोगा पंकज सिंह की टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि जाली नोटोें के कारोबार से जुड़े कुछ संदिग्ध लोग आलमबाग बस अड्डे पर किसी ग्राहक का इंतजार कर रहे हैं। सूचना पर पुलिस टीम ने घेरेबंदी कर बस अड्डे से एक युवक को दबोच लिया, जबकि उसका साथी फरार हो गया। पकड़े गए आरोपी की पहचान गोसाईंगंज के महुरापुर गांव निवासी राघवेंद्र सिंह उर्फ पिंटू के रूप में हुई। राघवेंद्र पीआरडी का जवान रह चुका है। पुलिस की मानें तो बीए पास राघवेंद्र ने कुछ दिन पहले नौकरी छोड़कर ईंट सप्लाई व खेती-किसानी का काम शुरू किया था। पूछताछ में उसने बताया कि गोंडा निवासी दिनेश चौधरी गैंग का सरगना है। वह गोमतीनगर में किराए पर कमरा लेकर रहता है। आरोपी ने अपने कुछ और साथियों के नाम भी कबूले हैं। पुलिस उनकी तस्दीक करा रही है। राघवेंद्र के बैग से कलर प्रिंटर व कुछ खास किस्म के कागजात मिले हैं। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर 59,400 रुपए के जाली नोट बरामद किए। सूत्रों का कहना है कि बरामद सौ व एक हजार के जाली नोट देखने में हूबहू असली जैसे हैं। बारीकी से ही देखने पर उनके जाली होने की जानकारी हो सकती है।
भट्टा व्यवसायी व प्रॉपर्टी डीलर ले जाते हैं नोट
कड़ाई से पूछताछ करने पर राघवेंद्र ने बताया कि राजधानी में भट्टा व्यवसायी मजदूरों को पैसा बांटने के लिए उससे जाली नोट लेते हैं। इसके अलावा शराब के ठेकों, परचून की दुकान व जुआ खेलने में भी इनका प्रयोग होता है। छोटे व्यवसायी व प्रॉपर्टी डीलर भी नकली नोट ले जाते हैं।
चार सौ के बदले एक हजार रुपए
असली चार सौ रुपए के बदले एक हजार रुपए के जाली नोट मिलते हैं। दबोचे गए आरोपी ने यह खुलासा किया। उसने बताया कि वह राजधानी के कई इलाकों में जाली नोट सप्लाई कर रहा था। जाली नोट पकड़ा न जाए इसके लिए कम पढ़े लिखे सब्जी-ठेले वाले, मजदूरों, रिक्शा चालक व छोटे व्यवसायियों को निशाना बनाया जाता है।
किराए के कमरे में छापते थे नोट
राघवेंद्र ने बताया कि जाली नोट छापने के लिए उन्होंने आलमबाग में एक कमरा किराए पर लिया था और यहीं से कारोबार चलाते थे। पुलिस ने बताया कि मुखबिरों के जरिए उन्हें इस अड्डे की जानकारी मिल गई और निगरानी के लिए कमरे के पास सादी वर्दी में पुलिस तैनात कर दी गई। इसके बाद सोमवार रात एक आरोपी को दबोच लिया गया।
सरगना ने राघवेंद्र को भी लगाया चूना
पुलिस की मानें तो गैंग के सरगना दिनेश चौधरी ने राघवेंद्र को भी चूना लगाया था। दरअसल, दोनों एक साथ मिलकर जाली नोटों का कारोबार करते थे। इस दौरान 108 एंबुलेंस सेवा में संविदा पर भर्ती के नाम पर दिनेश ने राघवेंद्र से पांच हजार रुपए वसूल लिए थे। नौकरी न मिलने पर पैसे वापस मंागे तो दिनेश से अनबन भी हो गई। राघवेंद्र ने बताया कि दिनेश ने नौकरी के नाम पर कई बेरोजगारों से पांच से 25 हजार रुपए तक वसूले हैं।