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लविवि छात्रों को देगा कॉपी की फोटोकॉपी

Wed, 13 Mar 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय नए सत्र से छात्रों को उनकी मांग पर मूल्यांकित की गई कॉपियों की फोटोकॉपी भी उपलब्ध कराएगा। हालांकि यह कवायद सूचना के अधिकार के अंतर्गत दिखाई जाने वाली कॉपियों की तुलना में छात्रों को कई गुना महंगी साबित होगी। छात्र को अपनी कॉपी की छायाप्रति के लिए प्रति कॉपी 300 रुपए भुगतान करना होगा। परीक्षा समिति इस बदलाव पर मुहर लगा चुकी है।
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पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में शैक्षणिक संस्थानों को सूचना के अधिकार के अंतर्गत परीक्षा की जांची गई कॉपियां दिखाने और उसकी छायाप्रति देने का आदेश दिया था। संयोग से इस आदेश के आने के समय ही लविवि की वार्षिक परीक्षाओं के परिणाम भी जारी हुए थे जिसमें काफी संख्या में परीक्षार्थी फेल हो गए थे। छात्रों ने सूचना के अधिकार के अंतर्गत कॉपियां देखने के लिए आंदोलन छेड़ दिया। काफी संघर्ष के बाद लविवि ने कॉपियां दिखाने की बात तो मान ली लेकिन उसकी छायाप्रति देने से मना कर दिया। इसको लेकर भी छात्रों ने काफी आपत्ति की थी और इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना बताया था। फिलहाल पिछले महीने हुई परीक्षा समिति की बैठक में छात्रों को उनकी उत्तर पुस्तिका की छायाप्रति उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। छात्र को परीक्षा का परिणाम आने के एक महीने के भीतर इसके लिए आवेदन करना होगा और प्रति कॉपी 300 रुपए चुकाने होंगे।

शुल्क पर उठाए सवाल
छात्र लविवि द्वारा कॉपियों के लिए निर्धारित किए गए शुल्क पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि आरटीआई एक्ट में फोटोकॉपी का प्रति पेज 2 रुपए शुल्क लेने की बात कही गई है। ऐसे में लविवि 32 पेज की कॉपी के 64 रुपए की जगह पांच गुना शुल्क वसूल रहा है।
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फोटोकॉपी हासिल करने वाले पहले छात्र बने मोहित
जेएनपीजी कॉलेज के लॉ थर्ड ईयर के छात्र मोहित मिश्र कॉपियों की फोटोकॉपी हासिल करने वाले पहले छात्र बन गए हैं। सूचना के अधिकार के अंतर्गत मोहित ने मूल्यांकन व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल खड़े किए थे और कई मंचों पर इसकी शिकायत की थी। कॉपी मिलने के बाद मूल्यांकन में कमियों की मोहित की शिकायत को और बल मिला है। उनकी कॉपी में एक अनिवार्य प्रश्न जंचा ही नहीं है। दूसरे प्रश्नों में भी खंडवार अंक नहीं दिए गए। मोहित को एक अन्य आरटीआई में दी जानकारी में लविवि प्रशासन ने भी माना कि कॉपियों का मूल्यांकन ठीक नहीं हुआ है। परीक्षा नियंत्रक के निर्देश पर की गई जांच के बाद परीक्षा अधीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रथम प्रश्न के दस खंड में कुछ परीक्षकों ने खंडवार अंक न देकर सभी खंडों के अंक एक साथ दे दिए हैं। यद्यपि नियम के मुताबिक प्रत्येक खंड के अलग-अलग अंक दिए जाने चाहिए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि छात्र की बीमा विधि के प्रथम प्रश्न के दो खंड चेक ही नहीं हुए। इस रिपोर्ट के बाद परीक्षा नियंत्रक ने बैकपेपर परीक्षा के मूल्यांकन के दौरान परीक्षकों को सभी खंड का अलग-अलग मूल्यांकन कर नंबर देने के निर्देश दिए। मोहित ने कुलपति को कॉपियों की प्रति के साथ परीक्षक के खिलाफ कार्रवाई का प्रत्यावेदन दिया है।

कोट्स
छात्रों को अब कॉपी देखने के लिए आरटीआई के अंतर्गत आवेदन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। वे 300 रुपए शुल्क जमा कर सीधे कॉपी देख सकेंगे और उसकी छायाप्रति भी प्राप्त कर सकेंगे।
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प्रो. अकील अहमद, परीक्षा नियंत्रक
लखनऊ विश्वविद्यालय
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