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14 साल बाद दुराचार के आरोपी को सजा

Sun, 03 Mar 2013 05:31 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। वर्ष 1999 में मड़ियांव में सामूहिक दुराचार के मामले में अपचारी को किशोर न्याय बोर्ड ने दोषी सिद्ध करार दिया है। अब उसे इटावा के विशेष गृह में तीन साल बिताने होंगे। तीन सदस्यीय बोर्ड ने शनिवार को सर्वसम्मति से इसके आदेश जारी कर दिए। दुराचार का यह मामला प्रधान न्यायाधीश विजयराजे सिंधिया के आधीन लखनऊ किशोर न्यायालय में चलाया गया। दोषी सिद्ध होने पर किशन (परिवर्तित नाम) ने जेजे बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट उदयवीर सिंह, दिनेश कुमार पांडेय और डॉ. रश्मि रस्तोगी के समक्ष सरेंडर कर दिया। उसके वकील ने जेजे बोर्ड में जमानत के लिए अपील की। लेकिन बोर्ड ने इसे खारिज करते कहा कि उसे सुधारगृह भेजा जा रहा है। जो सजा नहीं है, इसलिए उसे जमानत नहीं दी जा सकती है। किशन को तीन साल इटावा विशेष गृह में रहना होगा। उसने करीब तीन महीने जिला कारागार और लखनऊ संप्रेक्षण गृह में बिताए हैं इन्हें भी सजा में शामिल किया जाएगा।
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मामला ये था ः 20 मार्च 1999 को अलीनगर निवासी ने मड़ियांव थाने में एफआईआर लिखवाई थी कि उसकी 15 वर्षीय बेटी को रोशनाबाद निनवासी राजेश व किशन (दोनों परिवर्तित नाम) फुसला कर भगा ले गए थे। उसे एक दिन भूतनाथ स्थित मंदिर में रखा। इसके बाद आठ दिन टेढ़ी पुलिया स्थित उनके एक दोस्त के घर में रखकर दुराचार किया। आरोपी उसे कहीं और ले जा रहे थे तभी पीड़ित के पिता ने अपनी बेटी को देख लिया और उसे छुड़ाया। पीड़ित ने बताया कि राजेश ने आठ बार और किशन ने दो बार दुराचार किया था।
राजेश बरी हो चुका है ः दुराचार में मुख्य आरोपी और बालिग राजेश को सेशन कोर्ट बरी कर चुका है। उस पर पीड़िता से 8 बार दुराचार करने के आरोप थे। किशन पर दो बार दुराचार के आरोप थे, घटना के वक्त वह नाबालिग था। पीड़िता के परिजनों के अनुसार किशन पर सख्ती बरती गई, वैसी ही राजेश पर भी बरती जानी चाहिए थी, लेकिन वे गरीबी की वजह से मामले को ठीक से उठा नहीं सके।
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अब शादीशुदा है दुराचारी ः दुराचार के दोषी अपचारी किशन की उम्र घटना के वक्त 11 वर्ष थी। आज वह 25 साल का हो चुका है और एक दवा कंपनी में ड्राइवर है। उसकी ढाई साल और छह महीने की दो बेटियां होंगी। ऐसे में उसे सुधार गृह में रखने के लिए राज्य सरकार को विशेष व्यवस्था करनी होगी।
4 महीने में निपटना था, 14 साल लगे ः जेजे एक्ट 2000 के तहत नाबालिगों के मामले 4 महीने में निपटाए दिए जाने चाहिए। लेकिन मामलों के निस्तारण में 10 से 14 साल तक लग रहे हैं। जानकारी के मुताबिक किशन के मामले के अलावा वर्ष 2000 से पहले के करीब 450 मामले अब भी किशोर न्यायालय में लंबित हैं। इनमें से करीब 30 प्रतिशत मामले दुराचार और हत्या से जुड़े हैं। दूसरी तरफ 2000 के बाद के करीब 1300 मामले चल रहे हैं, जिनमें 100 से अधिक दुराचार के हैं।
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