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इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू करेंगे फाउंडेशन कोर्स

Thu, 31 Jan 2013 05:30 AM IST
Lucknow
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लखनऊ। दाखिले का सूखा झेल रहे इंजीनियरिंग कॉलेजों को भी अब गुणवत्ता की चिंता सताने लगी है। यही वजह है कि वे इंजीनियरिंग में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों को प्रवेश के पहले ही और बेहतर बनाने की सोच रहे हैं। कॉलेजों ने नए छात्रों के लिए फाउंडेशन कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव दिया है, जिस पर जीबीटीयू ने भी मुहर लगा दी है। कॉलेज इसका आयोजन अपने स्तर एवं संसाधन पर अपने क्षेत्रों में करेंगे। इस साल से यह कवायद अमल में आ जाएगी।
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प्रदेश के इंजीनियरिंग एवं मैनेजमेंट कॉलेजों में प्रवेशार्थियों की संख्या लगातार घट रही है। गौतम बुद्घ प्राविधिक विश्वविद्यालय भी इस पर चिंतित है और यही वजह है कि जीबीटीयू ने इस सिलसिले में एक कमेटी गठित की है। विवि प्रशासन एवं कॉलेजों का मानना है कि दाखिले कम होने की एक वजह औसत छात्रों का प्रवेश एवं खराब प्लेसमेंट है। दरअसल, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद एवं प्रदेश शासन ने प्रवेश के मानक लगातार शिथिल किए हैं। पिछले सत्र में एआईसीटीई ने इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए न्यूनतम अर्हता घटाकर बारहवीं में 45 फीसदी कर दी थी। कॉलेजों में सीधे दाखिले के दौरान अच्छे विद्यार्थियों को वरीयता देने की जीबीटीयू की कवायद भी सफल नहीं हो पाई। सीधे दाखिले की स्थिति में जीबीटीयू ने इंटरमीडिएट में न्यूनतम 60 फीसदी अंक होने का मानक तय किया था, लेकिन शासन ने इसे पलट कर 50 फीसदी कर दिया। हालांकि अब कॉलेजों को समझ में आने लगा है कि औसत विद्यार्थियों के दाखिले से कुछ सीटें और तो भरी जा सकती हैं, लेकिन खराब परिणाम एवं प्लेसमेंट का कॉलेज की साख पर उल्टा असर भी पड़ रहा है, इसलिए दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को तराशने की पहल शुरू की गई है। कॉलेज नए विद्यार्थियों के लिए जून में फाउंडेशन कोर्स शुरू करेंगे। इस दौरान उन्हें गणित एवं अंग्रेजी पढ़ाई जाएगी, जिससे पाठ्यक्रम के दौरान उन्हें इंजीनियरिंग के कोर विषयों में गणित एवं भाषा के आधार पर समस्या न आए। जीबीटीयू के कुलसचिव यूएस तोमर का कहना है कि केंद्रीय प्रवेश समिति ने फाउंडेशन कोर्स के लिए सहमति दे दी है। कॉलेज इसका अपने स्तर से संचालन कर सकेंगे।
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