लखनऊ। मेघालय में यूं तो आर्किड प्रचुर मात्रा में उगाए जाते हैं, लेकिन अब वैज्ञानिक तकनीकों के साथ इनका उत्पादन बढ़ाने में नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई) योगदान देगा। इसके जरिए उत्तरपूर्वी राज्यों में विकास की नई गंगा बहेगी। मेघालय बेसिन विकास प्राधिकरण (एमबीडीए) और एनबीआरआई ने एक समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके अनुसार कई अन्य फसलों के उत्पादन के लिए भी सहयोग किया जाएगा।
मेघालय के प्रमुख सचिव आर मिश्रा और एनबीआरआई निदेशक डॉ. सीएस नौटियाल के बीच हुए इस करार के मुताबिक, शिलांग के जैव संसाधन विकास केंद्र में स्थापित फैसिलिटी के विकास में एनबीआरआई योगदान देगा। यह केंद्र क्षेत्रीय निवासियों के लिए विकास के बेहतर सामाजिक व आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए हाल ही में तैयार किया गया है। एनबीआरआई के वैज्ञानिक एके गौनियाल ने बताया कि संस्थान मेघालय में सतत कृषि, संरक्षण, बेहतर तकनीकी विकास, जैव विविधता के उपयोग पर काम करेगा। यहां औषधीय पौधे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं, लेकिन तकनीकों की कमी रही है। एनबीआरआई अपनी तकनीकों से पूर्वोत्तर के लोगों को अपने संसाधन उपयोग करने के लिए ज्यादा सक्षम बनाएगा। साथ ही मेघालय की जलवायु और मिट्टी की जांच में संस्थान ने पाया है कि यहां अदरक, आलू, मटर और मसूर जैसी फसलों से अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। इस काम में उत्तर प्रदेश सरकार का कृषि विभाग भी मदद देगा।