लखनऊ। चांद के नमूदारा होते ही अश्कयार अजादार अपने आंसुओं को रोक नहीं सके और करबला के शहीदों को याद कर रोने लगे। शोकाकुल महिलाओं ने सुहाग की निशानियों को बढ़ा दिया। अजाखानों में फर्श-ए-अजा पर पुरसा देने का दौर शुरू हो गया। घर-घर से सदा-ए-हुसैनी गूंजने लगी। यह माहौल गुरुवार शाम छह बजे के बाद पुराने लखनऊ के हर गली-मोहल्ले का था। मोहर्रम का चांद देख अजादार गम में डूब गए। पुराने लखनऊ में स्याह माहौल तारी हो गया। गुरुवार को मोहर्रम के चांद के पूर्व ही सुबह से मजलिस और मातम का दौर शुरू हो गया था। शाम को मोहर्रम का चांद होते ही घर-घर से सदा-ए-हुसैनी बुलंद होने लगीं। हुसैनाबाद व नक्खास इलाकों में स्याह परचम लगा दिए गए। अजादार हर तरफ स्याह लिबास में नजर आने लगे। इमामबाड़ा गुफरान मॉब में मौलाना कल्बे जव्वाद ने एक मजलिस को संबोधित करते हुए हजरत इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। कई अन्य अजाखाना-ए-शब्बीर में अलम सजा कर मातमी सदाएं बुलंद होने लगीं। शुक्रवार से पहली मोहर्रम होगी। इसके साथ ही दस दिवसीय मजलिसों का दौर शुरू हो जाएगा। साथ की करबला के शहीदों को पुरसा देने के लिए शहर में जुलूस भी निकलेंगे। उधर, हुसैनाबाद ट्रस्ट की ओर से शहर के ऐतिहासिक इमामबाड़ों और अजाखानों में मजलिसों का दौर भी शुरू हो जाएगा। बड़े इमामबाड़े में सुबह आठ व दोपहर तीन बजे, छोटे इमामबाड़े में सुबह नौ व शाम 6:30 बजे और शाहनजफ इमामबाड़े में सुबह 10 बजे के अलावा सआदतअली खां के मकबरे में सुबह आठ और शाम चार बजे भी मजलिस और मातम का दौर शुक्रवार से शुरू हो जाएगा।
सुन्नी समुदाय भी आयोजित करेगा मजलिस ः करबला के शहीदों को पुरसा देने के लिए शिया समुदाय के साथ सुन्नी समुदाय भी मजलिसों का आयोजन करेगा। इसमें ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन की ओर से शहर की एक दर्जन मसजिदों में मजलिसों को विभिन्न उलमा खिताब करेंगे। मंगलवार को मिशन कार्यालय बालागंज में हुई एक बैठक में ये फैसला लिया गया। बैठक की अध्यक्षता सैयद मोहम्मद अहमद किछौछवी ने की।
शोहदा-ए-इस्लाम की याद में 10 दिवसीय जलसे
- शाम 4 बजे : शाहमीना शाह में जलसा-ए-शोहदा-ए-करबला
- शाम 5 बजे : दादा मियां दरगाह जलसा-ए-शोहदा-ए-करबला
- शाम 6 बजे : एक मीनारा मस्जिद में जलसा कारी
- रात 8 बजे : शौकत अली का हाता रकाबगंज में जलसा-ए-शोहदा-ए-इस्लाम