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बीएचयू में खाली हैं शिक्षकों के 657 पद

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बीएचयू ने भले ही देश के शिक्षण संस्थानों पर किए गए नेल्सन और आउटलुक के सर्वे में टॉप टेन में जगह बना ली हो, लेकिन यह विश्वविद्यालय भी शिक्षकों की कमी झेल रहा है।
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यह जानकर हैरानी होगी कि विश्वविद्यालय में करीब साढ़े छह सौ शिक्षकों के पद रिक्त हैं और यह संख्या उत्तर प्रदेश के अन्य तीन केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिहाज से कहीं ज्यादा है।

ऐसा हम नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों की जारी की गई सूची कह रही है।

343 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद

आयोग की रिपोर्ट में देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के साढ़े पांच हजार से अधिक पद रिक्त बताए गए हैं और अकेले बीएचयू में 657 पद खाली पड़े हैं।

यूजीसी की रिपोर्ट के अनुसार, बीएचयू में कुल 1862 पद स्वीकृत हैं। मौजूदा समय में 762 प्रोफेसर, 315 एसोसिएट प्रोफेसर और 128 असिस्टेंट प्रोफेसर कार्यरत हैं जबकि 118 प्रोफेसर, 196 एसोसिएट प्रोफेसर और 343 असिस्टेंट प्रोफेसर के पद रिक्त हैं।

अगर उत्तर प्रदेश के अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों पर नजर डाली जाए तो इस मामले में बीएचयू की स्थिति सबसे खराब है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 449, डा. भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ में 41 और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 511 पद रिक्त हैं।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 60 फीसदी पद खाली

पूरब का ऑक्सफोर्ड कहे जाने वाले इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में 60 फीसदी शिक्षकों के पद सालों से खाली पड़े हैं। दो साल पहले इन पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन निकाला गया था, लेकिन आज तक भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।

उच्च शिक्षा में प्रीमियम संस्थान माने जाने वाले केंद्रीय विश्वविद्यालयों में बीएचयू तथा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय भी शिक्षकों के खाली पद भरने में असफल रहे हैं जबकि खुद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी एक साल पहले सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के खाली पड़े पदों को लेकर चिंता जता चुके हैं।

सालों से बंद है शिक्षकों की भर्ती

केंद्रीय विश्वविद्यालय देश में उच्च शिक्षा के मानक संस्थान रहे हैं लेकिन पिछले कुछ सालों में जिस तरह इन संस्थानों में प्रशासनिक अराजकता का वातावरण बढ़ा है, उसके चलते ज्यादातर संस्थान राजनीति के केंद्र बन गए हैं।

शिक्षकों की भर्ती सालों से बंद है। जब कभी प्रयास हुए भी तो मुकदमेबाजी व गुटबाजी के चलते प्रयास सफल नहीं हुए। राष्ट्रपति ने पिछले हफ्ते ही केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ राष्ट्रपति भवन में दूसरी बार बातचीत की। उन्होंने विश्वविद्यालयों में सबसे पहले योग्य शिक्षकों को जोड़ने की बात कही।

यूजीसी ने जनवरी 2014 को जो आंकड़ा जारी किए, वे वाकई चिंताजनक हैं। देश के कुल 39 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 15573 शिक्षकों के पद हैं इनमें से 5707 पद खाली पड़े हैं।

2012 में 507 पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया

उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा ज्यादा ही चिंताजनक है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में 852 शिक्षकों के पद हैं, इनमें से 511 पद खाली पड़े हैं। शिक्षकों के खाली पदों में आरक्षित पदों से ज्यादा सामान्य पद हैं। रिक्तियों में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर तथा असिस्टेंट प्रोफेसर तीनों तरह के पद हैं। बड़ी संख्या में प्रोफेसर के पद भी खाली पड़े हैं।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो. वीपी सिंह के अनुसार लंबी जद्दोजहद के बाद 2012 में 507 पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था। उन्होंने कहा कि हम कोशिश कर रहे हैं कि अगले एक दो महीने में इन रिक्तियों पर शिक्षकों की भर्ती का काम पूरा कर लिया जाए। दो साल की कोशिश के बाद भी अभी तक भर्ती की प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हो सकी, वे इसका सही जवाब नहीं दे सके।a
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जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति का अनुरोध

उत्तर प्रदेश के अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में यद्यपि इलाहाबाद से स्थिति बेहतर है लेकिन वहां भी बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली हैं। अलीगढ़ मुस्लिम विवि में 1506 शिक्षक के पदों में से 449 पद रिक्त हैं।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में 1862 पदों में से 657 पदों पर शिक्षकों की तैनाती का मामला लटका हुआ है। लखनऊ स्थित बाबा भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में अभी मात्र 143 शिक्षकों के पद स्वीकृत हैं, उनमें से भी 41 पदों पर भर्ती नहीं हो पा रही है।

यूजीसी ने एक बार फिर इन विश्वविद्यालयों को पत्र भेजकर जल्द से जल्द शिक्षकों की नियुक्ति किए जाने का अनुरोध किया है।
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