बच्चों के लिए अच्छी खबर है। बच्चों को उनका हक मिले, इसके लिए मनोरंजन कर विभाग सक्रिय हो गया है।
पीवीआर सहित सिनेमाघरों के बुकिंग विंडो के बाहर सूचना चस्पा कर दी गई कि यहां पांच साल तक के बच्चों का कोई टिकट नहीं लगता।
12 साल की उम्र तक के बच्चों को रियायती टिकट देने का प्रावधान है, यह अनिवार्य नहीं है लेकिन सहायक मनोरंजन कर आयुक्त सिनेमाघर संचालकों को सलाह दी है कि स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां चल रही हैं, सो इस नियम पर भी ध्यान दें और बच्चों के लिए रियायती टिकट की व्यवस्था करें।
गैर कमीशनशुदा सैनिकों को टैक्स में छूट, पांच साल तक के बच्चों को मुफ्त प्रवेश और पांच से 12 साल के बच्चों को रियायती दर पर टिकट उपलब्ध कराने का प्रावधान है। हालांकि रियायती पर टिकट देने का प्रावधान अनिवार्य नहीं है।
यह सिनेमाघर संचालकों की मर्जी पर निर्भर करता है लेकिन पांच साल तक के बच्चों को मुफ्त प्रवेश और सैनिकों को टैक्स में छूट देना अनिवार्य है। हालांकि सिनेमाघरों में पांच साल से कम उम्र के बच्चों का भी टिकट बनाया जा रहा है।
सहायक मनोरंजन कर आयुक्त केएस दीक्षित ने इस मसले पर सिनेमाघरों को नोटिस जारी कर दिया और बुधवार को उनके निर्देश पर विभाग के वरिष्ठ निरीक्षक अरविंद वर्मा, निरीक्षक लालजी यादव ने मल्टीप्लेक्स सहित कई सिनेमाघरों में जाकर जांच-पड़ताल की।
ज्यादातर जगह नियमों का पालन नहीं किया जा रहा था। विभाग ने सिनेमाघर संचालकों को बुकिंग विंडो के पास तत्काल नोटिस चस्पा करने के निर्देश दिए और शाम को ज्यादातर सिनेमाघरों में इस आशय का नोटिस लगा दिया गया कि वहां पांच साल के बच्चों का कोई टिकट नहीं लगता है।
केएस दीक्षित के अनुसार उन्होंने सभी सिनेमाघर संचालकों को चेतावनी दी है कि कहीं भी नियम के खिलाफ टिकट बनाया गया तो लाइसेंस कैंसिल कर दिया जाएगा।