गाजियाबाद में सामूहिक हत्याकांड का पुलिस ने आनन-फानन में खुलासा करने का दावा किया है। पुलिस का दावा है कि उसने सही हत्यारे को पकड़ा है और उसके पास से खून से सने कपड़े व लूटे गए जेवर व नकदी बरामद हुए हैं।
गाजियाबाद पुलिस की कहानी में कई पेंच ऐसे हैं जिसने उसकी कहानी में तमाम सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहला सवाल
आईजी कानून-व्यवस्था आरके विश्वकर्मा ने बुधवार शाम को जब इस वारदात का हवाला दिया था तब उन्होंने कहा था कि रात करीब दस बजे सतीश गोयल के एक पड़ोसी ने गोयल के घर में हो रही चीख-पुकार सुन कर उन्हें फोन किया था।
बकौल आईजी गजियाबाद पुलिस ने बताया था कि फोन सतीश गोयल ने उठाया था और इसे अपना व्यक्तिगत मामला बताया था।
मानी सी बात है कि जिस पड़ोसी के पास सतीश गोयल का फोन नंबर होगा वह उनका अच्छा जानने वाला होगा और वह अपने पड़ोसी की आवाज भी पहचानता होगा।
दूसरा सवाल
एडीजी ने गुरुवार को बताया कि राहुल ने साढ़े सात बजे से नौ बजे के दौरान सारी वारदात की।
आईजी ने बताया था कि रात दस बजे किसी पड़ोसी ने फोन किया था जिसकी सतीश गोयल से बात हुई थी। इस विरोधाभास को बचाने के लिए अब पुलिस ने यह कहना शुरू कर दिया है कि जो फोन आया था उसे राहुल ने ही रिसीव किया था।
ऐसे में राहुल हत्या करने के एक घंटे बाद तक सात लाशों के साथ घर में रुका रहा। उसे पकड़े जाने का या शोर-शराबा होने की वजह पुलिस के आने का कोई डर नहीं रहा।
सबसे बड़ी बात यह कि पड़ोसी ने भी राहुल और सतीश गोयल की आवाज में फर्क नहीं महसूस किया।
तीसरा सवाल
एडीजी का कहना था कि राहुल शाम को करीब साढ़े सात बजे छत फांद कर गोयल परिवार के यहां घुस गया था और इसमें उसके पैर में चोट आ गई थी।
बकौल एडीजी घर में घुस कर पहले राहुल ने सतीश गोयल की बहू रेखा और उसकी 13 वर्षीया बेटी मेघा की चाकू से वार कर हत्या कर दी।
इसी बीच रेखा का पति सतीश का बेटा सचिन ऊपर आ गया तो उस पर भी हमला कर दिया लेकिन सचिन नीचे भाग गया। राहुल ने नीचे जाकर सचिन की हत्या कर दी।
इसके बाद पहले तल पर सचिन के बेटे अमन व बेटी नेहा की हत्या कर दी।
फिर नीचे आया और सतीश गोयल की हत्या कर दी और फिर कमरे में जाकर सतीश की पत्नी मंजू की हत्या कर दी।
सात लोगों का कत्ल पांच मिनट में तो हो नहीं सका होगा। कम से कम आधे से पौन घंटे लगे होंगे। परिवार के लोगों ने चुपचाप हमला भी नहीं होने दिया होगा, विरोध भी किया होगा।
जब पहली बार राहुल ने हमला किया होगा तो सचिन की पत्नी और बेटी चीखी होंगी। सचिन पर हमला होने पर उसने भी शोर मचाया होगा। बच्चों भी शोर मचा रहे होंगे। इस सब शोर-शराबे की जानकारी सतीश गोयल व उनकी पत्नी को भी हुई होगी।
लेकिन उन्होंने न अपने बचाव की कोई कोशिश की और न ही पुलिस को या किसी और को। मदद के लिए फोन किया।
चौथा सवाल
अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था अरुण कुमार ने गुरुवार को खबरनवीसों को जानकारी दी थी कि राहुल को गोयल परिवार ने कुछ दिन पहले डांट-फटकार कर नौकरी से निकाल दिया था।
इसी का बदला लेने के लिए राहुल ने यह वारदात की। एडीजी ने कहा कि राहुल ने वारदात करना स्वीकार किया है और उसने यह भी कहा है कि वह अकेला था, वारदात में उसके साथ कोई और नहीं था।
पुलिस का कहना है कि राहुल ने घर में लूटपाट की। ऐसे तो राहुल का इरादा पहले से ही लूट का था न कि हत्या का।
जानकारों का कहना है कि अगर कोई बदला लेने की नीयत से किसी का कत्ल करता है और मौके पर मौजूद गवाहों को भी मार देता है
वैसे भी ऐसे अपराधी को वारदात अंजाम देते ही मौके से भागने की जल्दी होती है न कि घटनास्थल पर ही एक घंटा तक रुक कर लूटपाट करने की योजना बनाई जाती है। तमाम ऐसे तथ्य हैं, जिनके न पुलिस के पास जवाब हैं, न हल।