भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने बताया कि वह दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देगा जिसमें खेल संस्था के कामकाज को संभालने के लिए भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की तदर्थ समिति को बहाल करने का आदेश दिया गया है। डब्ल्यूएफआई का कहना है कि इस हस्तक्षेप से भारतीय पहलवानों की विश्व चैंपियनशिप में भागीदारी पर खतरा मंडरा सकता है।
कुछ शीर्ष पहलवानों की याचिका पर आया अंतरिम आदेश
मौजूदा आदेश डब्ल्यूएफआई के कामकाज पर रोक लगाने और खेल के लिए राष्ट्रीय महासंघ के रूप में कोई भी गतिविधि करने से रोकने की मांग की याचिका पर आया है। शीर्ष पहलवान बजरंग पूनिया, विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और उनके पति सत्यव्रत कादियान की याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करते हुए न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने कहा कि आईओए समिति का पुनर्गठन कर सकता है।
यूडब्ल्यूडब्ल्यू और आईओसी से संपर्क करेगा डब्ल्यूएफआई
आईओए ने चार अप्रैल को तदर्थ पैनल समिति को भंग कर दिया था और यूडब्ल्यूडब्ल्यू ने डब्ल्यूएफआई के चुनाव कराने के बाद इस साल 13 फरवरी को निलंबन हटा दिया था। डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष संजय सिंह ने न्यूज एजेंसी पीटीआई के हवाले से कहा, हम इसे दो न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष ले जाएंगे। आईओए ने अपना तदर्थ पैनल भंग कर दिया था। हम विश्व संचालन संस्था यूडब्ल्यूडब्ल्यू और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) से भी संपर्क करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी थी कि बाहरी हस्तक्षेप का असर खिलाड़ियों पर पड़ सकता है। दो विश्व चैंपियनशिप होने वाली हैं। भारतीय पहलवानों की भागीदारी खतरे में आ सकती है।
अंडर-17 विश्व चैंपियनशिप 19 से 25 अगस्त तक जोर्डन के अम्मान में आयोजित की जाएगी, जबकि अंडर-20 विश्व चैंपियनशिप दो से आठ सितंबर तक स्पेन के पोंटेवेड्रा में होगी। यूडब्ल्यूडब्ल्यू अध्यक्ष नेनाद लालोविच ने 25 अप्रैल को डब्ल्यूएफआई अध्यक्ष को लिखे पत्र में स्पष्ट किया था कि महासंघ का कामकाज संभाल रहा तदर्थ पैनल उन्हें स्वीकार्य नहीं है।