नीरज चोपड़ा ने कहा, 'मुझे पता था कि मैंने कुछ खास कर दिया है। असल में मैंने सोचा कि मैंने अपना निजी सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। मेरी थ्रो काफी अच्छी गई थी। उन्होंने कहा, 'अगले दिन मेरा पूरा बदन दुख रहा था लेकिन यह दर्द सहन करने में कोई समस्या नहीं थी।' नीरज ने आगे कहा, 'ये मेरा नहीं, पूरे देश का मेडल है। जब से मेडल जीता हूं, जेब में रखकर घूम रहा हूं।' सेना के 23 साल के इस खिलाड़ी ने कहा, 'मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि अपना 100 फीसदी दो और घबराओ नहीं, विरोधी चाहे कोई भी हो। आपको बस यही करने की जरूरत है और इस स्वर्ण पदक के यही मायने हैं।'
भारत का एथलेटिक्स में ओलंपिक पदक जीतने का पिछले 121 साल का इंतजार खत्म कर दिया। नीरज ओलंपिक में ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धा में गोल्ड मेडल जीतने वाले देश के पहले और व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय खिलाड़ी हैं। इससे पहले निशानेबाज अभिनव बिंद्रा ने बीजिंग ओलंपिक 2008 में पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल में स्वर्ण पदक जीता था।
नीरज ने पहले प्रयास में 87.03 मीटर भाला फेंका था और वह शुरू से ही पहले स्थान पर चल रहे थे। वहीं, दूसरे प्रयास में नीरज ने 87.58 मीटर भाला फेंका। यहीं उनका गोल्ड मेडल पक्का हो गया था। तीसरे प्रयास में वह 76.79 मीटर भाला ही फेंक पाए जबकि चौथे प्रयास में फाउल कर गए। उन्होंने छठे प्रयास में 84.24 मीटर भाला फेंका।
गोल्ड जीतने के बाद नीरज ने कहा था, 'विश्वास नहीं हो रहा। पहली बार है जब भारत ने एथलेटिक्स में स्वर्ण पदक जीता है इसलिए मैं बहुत खुश हूं। हमारे पास अन्य खेलों में ओलंपिक का एक ही गोल्ड है।'