गैर मान्यता प्राप्त भारतीय कबड्डी टीम
- फोटो : ट्विटर
उन्होंने कहा, 'हमारे अपने पांच स्वतंत्र महासंघ हैं जो प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए निजी तौर पर पाकिस्तान गए थे। इसलिए इसमें कुछ भी गलत नहीं है।' नई दिल्ली में खेल मंत्री ने कहा कि उन्होंने भारतीय एमेच्योर कबड्डी महासंघ को जांच के आदेश दिए हैं।
रिजिजू ने कहा, 'हमारी आधिकारिक कबड्डी टीम पाकिस्तान नहीं गई थी। हमें नहीं पता कि वहां कौन गया था। यह सही नहीं है कि कोई भी अनधिकृत टीम कहीं भी जाए और भारत के नाम से खेले। हमने कोई आधिकारिक टीम नहीं भेजी।'
उन्होंने कहा, 'हम कबड्डी महासंघ ने जांच करने को कहेंगे और उन लोगों की पहचान करेंगे जो वहां गए और बिना स्वीकृति के भारत के नाम का इस्तेमाल किया। किसी भी मान्यता प्राप्त टूर्नमेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए यह अनिवार्य है कि संबंधित खेल के राष्ट्रीय महासंघ से स्वीकृति ली जाए।’ मंत्री ने हालांकि कहा, ‘अगर कोई किसी निजी टूर्नमेंट के लिए जाता है तो हम कुछ नहीं कर सकते।'
फाइनल में भारत को हराकर खिताब जीतने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपनी टीम को ट्विटर पर बधाई दी और इस बारे में पूछने पर रिजिजू ने कहा कि इमरान ने बुद्धिमानी का काम नहीं किया।
उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के लिए यह बुद्धिमानी भरा नहीं है कि वह इस तरह के बयान दें। यह गंभीर मुद्दा है। इमरान खान स्वयं खिलाड़ी हैं, अब वह प्रधानमंत्री बन गए हैं लेकिन उन्हें इस तरह के बयान देने से बचना चाहिए।' बाजवा ने कहा है कि यह टूर्नमेंटा सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव के 550वें जयंती समारोह के कार्यक्रम का हिस्सा था।
इसके पहले पाकिस्तान ने रविवार को लाहौर के पंजाब स्टेडियम में चिर-प्रतिद्वंद्वी भारत को हराते हुए सर्कल कबड्डी विश्व कप जीत लिया था। गैर मान्यता प्राप्त भारतीय टीम को फाइनल में 43-41 से मात देते हुए पाकिस्तान ने पहली बार खिताब अपने नाम किया। इस नजदीकी मुकाबले में मेजबान टीम हाफ टाइम तक 18-24 से पीछे थी, लेकिन दूसरे हाफ में पाकिस्तान ने जोरदार पलटवार करते हुए भारत को दो अंक से हरा दिया। पाकिस्तान की ओर से मोहम्मद इरफान ऊर्फ मन्ना जट्ट और स्टार रेडर शफीक चिश्ती ने जीत के हीरो रहे।
इसके पहले चार बार भारत फाइनल में पाकिस्तान को फाइनल में हरा चुका था, लेकिन पांचवीं बार बेहद करीबी अंतर से ही सही उसे जीत मिल ही गई। यह विश्व कप बेहद विवादों में भी रहा। दरअसल, भारतीय टीम बगैर किसी को सूचना दिए 7 फरवरी को वाघा बॉर्डर के रास्ते लाहौर पहुंची थी। इस दल में 45 खिलाड़ी, 12 अधिकारी और कोच शामिल थे। भारत में कबड्डी की सबसे बड़ी संस्था एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया (AKFI) ने पाकिस्तान को पत्र लिखकर कहा था कि उन्होंने सर्कल कबड्डी विश्व कप के लिए कोई टीम भेजी ही नहीं, जो टीम लाहौर गई, उसे भारत के नाम और तिरंगे के साथ खेलने तक की अनुमति नहीं है। इस टीम के खिलाफ खेल मंत्रालय की जांच चल रही है।
सोशल मीडिया पर भारतीय टीम की पाकिस्तान से फोटो वायरल होने के अगले ही दिन यानी 8 फरवरी को खेल मंत्री किरण रिजिजू ने अपने बयान में कहा था कि, 'पाकिस्तान जाने के लिए किसी ने भी कबड्डी खिलाड़ियों को अनुमति नहीं दी। खिलाड़ियों को वीजा देने में हमारी कोई भूमिका नहीं है। हम कबड्डी फेडरेशन से बात करेंगे कि उन्होंने इस दौरे की सूचना पहले संबंधित विभाग या मंत्रालय को दी या नहीं।'
पाकिस्तान में आयोजित सर्कल कबड्डी वर्ल्ड कप है, जो कबड्डी मानकों से अलग है। सर्कल कबड्डी को इंटरनेशनल कबड्डी फेडरेशन की ओर से मान्यता भी प्राप्त नहीं है। यह एशियाई खेलों का एक हिस्सा है। सर्कल कबड्डी में गोल घेरे में खिलाड़ी खेलते हैं न कि स्टैंडर्ड कबड्डी। तय मानकों के मुताबिक, एक कबड्डी टीम में 80 किलो वजन से नीचे के 7 खिलाड़ी होते हैं, जबकि सर्कल कबड्डी में वजन का कोई प्रतिबंध नहीं है। साथ ही इस टूर्नामेंट में एक टीम में 8 खिलाड़ी खेलते हैं। इसके अलावा खेल का मैदान भी गोलाकार ही रखा जाता है।