जीत के बाद रोने लगे सौरव
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सौरव पिछले 20 सालों से स्क्वैश खेल रहे हैं और अपने चौथे राष्ट्रमंडल खेलों में जाकर सिंगल्स इवेंट में पदक जीत पाए हैं। सौरव ने सबसे पहली बार 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा लिया था। ऐतिहासिक जीत के बाद सौरव भावुक हो गए और रोने लगे।
इस जीत के साथ सौरव ने इतिहास भी रच दिया है। स्क्वैश में महिला और पुरुष दोनों कैटेगरी को मिलाकर सिंगल्स इवेंट में किसी भी राष्ट्रमंडल खेलों में यह भारत का पहला पदक है। सौरव राष्ट्रमंडल खेलों में स्क्वैश सिंगल्स इवेंट में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए। इससे पहले भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों में स्क्वैश में पदक जरूर जीता है, लेकिन डबल्स इवेंट में।
सभी राष्ट्रमंडल खेलों को मिलाकर सौरव का यह इन खेलों में सिर्फ दूसरा पदक है। इससे पहले 2018 गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में सौरव ने मिक्स्ड डबल्स में रजत पदक जीता था। इसके अलावा वह एशियन गेम्स में सात पदक जीत चुके हैं। इनमें एक स्वर्ण, एक रजत और पांच कांस्य शामिल हैं। साथ ही सौरव वर्ल्ड डबल्स चैंपियशिप में एक स्वर्ण (2022) और दो रजत पदक (2004, 2016) जीत चुके हैं।
2018 राष्ट्रमंडल खेलों में सौरव ने दीपिका पल्लीकल के साथ स्क्वैश में मिक्स्ड डबल्स में रजत पदक जीता
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राष्ट्रमंडल खेलों में स्क्वैश को 1998 में शामिल किया गया था। तब से लेकर अब तक 24 सालों में सात राष्ट्रमंडल खेलों में स्क्वैश सिंगल्स में भारत का यह पहला पदक है। इस वजह से यह जीत सौरव के लिए और भी खास बन गई।
सौरव ने बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों में पहले मैच में श्रीलंका के शमिल वकील को 3-0 से हराया था। पहले मैच में श्रीलंका के शमिल वकील को 3-0 से हराया था। इसके बाद सौरव ने राउंज ऑफ 16 में कनाडा के डेविड बैलारगियोन को 3-0 से हराया। फिर सौरव ने क्वार्टर फाइनल में स्कॉटलैंड के ग्रेग लोब्बन को 3-1 से हराया था। सेमीफाइनल में भारत के सौरव घोषाल को न्यूजीलैंड के पॉल कोल ने 3-0 से हाराया। अब कांस्य पदक मैच में सौरव ने जीत हासिल की है।
CWG में मेंस सिंगल्स में सौरव घोषाल का सफर
- 2010: सौरव तीसरे राउंड में बाहर हो गए थे।
- 2014: सौरव कांस्य पदक मैच हार गए थे।
- 2018: सौरव राउंड ऑफ 32 में बाहर हो गए थे।
- 2022: सौरव ने कांस्य पदक हासिल किया।