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जहां होते हैं मां सरस्वती के प्रत्यक्ष दर्शन, दिखते हैं वीणा के तार

Tue, 04 Feb 2014 01:31 PM IST
राकेश/ टीम डिजिटल, अमर उजाला, दिल्ली।
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बसंत पंचमी को विद्या और वाणी की देवी सरस्वती का जन्मोत्सव दिवस कहा जाता है। धरती पर एक स्थान ऐसा है जहां पहुंचकर आपको यह एहसास होगा कि देवी सरस्वती यहां विराजमान हैं।
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माना जाता है कि यहीं देवी सरस्वती पहली बार प्रकट हुई थी। इसलिए इसे सरस्वती का जन्मस्थान भी कहा जाता है। यह स्थान बद्रीनाथ से महज तीन किलोमीटर की दूरी पर माणा गांव के पास स्थित है। यहां पर्वत के बीच से सरस्वती नदी की कलकल धारा का उद्गम होता है।

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इस उद्गम स्थल पर देवी सरस्वती का एक छोटा सा मंदिर है। माना जाता है इस मंदिर में देवी सरस्वती की प्रतिमा के दर्शन से साक्षात् सरस्वती के दर्शनों का लाभ मिलता है। माना जाता है कि देवी सरस्वती के हाथों में वीणा है जिसके सात सुरों से संसार में संगीत और जीव जंतुओं को वाणी मिली है।
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सरस्वती माता के मंदिर के ठीक बाहर सरस्वती की जलधारा पर जब सूर्य की रोशनी पड़ती है तो पत्थरों और पानी पर इन्द्रधनुष के सात रंग नजर आते हैं। लोग ऐसा मानते हैं कि यह सरस्वती की वीणा के सप्तसुर की रश्मियां हैं। दर्शनार्थी इसके दर्शन से स्वयं को धन्य और आनंदित महसूस करते हैं।
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