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अयोध्या का पौराणिक महत्व: सप्तपुरियों में से एक है अयोध्या, जानिए किसने बसाई यह नगरी

Wed, 05 Aug 2020 08:05 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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ram mandir bhoomi pujan: भारत के प्राचीन नगरों में से अयोध्या एक है। - फोटो : अमर उजाला
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आज दोपहर 5 अगस्त, बुधवार को अयोध्या राम मंदिर के निर्माण की आधारशिला रखी जाएगी। अभिजीत मुहूर्त में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर की नींव पूजा कर मंदिर का शिलान्यास रखेंगे। इस मौके पर सबकी नजरें अयोध्या पर टिकी रहेंगी। अयोध्या का धार्मिक महत्व काफी है। भारत के प्राचीन नगरों में से अयोध्या एक है। हिंदू पौराणिक मान्याताओं के अनुसार सप्त पुरियों में अयोध्या, मथुरा, हरिद्वार, काशी, कांची, अंवतिका और द्वारका को शामिल किया गया है। ये सभी सातों मोक्षदायिनी और पवित्र नगरियां यानी पुरियां हैं। चार वेदों में पहले अथर्ववेद में अयोध्या को ईश्वर का नगर माना है। अयोध्या में भगवान राम का जन्म हुआ था। अयोध्या नगरी सरयू नदी के किनारे पर बसा हुआ है। रामायण के अनुसार राजा मनु ने अयोध्या बसाई थी। अयोध्या का संबंध न सिर्फ भगवान राम से है बल्कि यहां बौद्ध, जैन और इस्लाम धर्म का भी है।
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अयोध्या की स्थापना किसने की ?
रामायण के अनुसार सरयू नदी के किनारे बसा अयोध्या नगर सूर्य पुत्र वैवस्वत मनु के द्वारा स्थापना की गई थी। वैवस्वत मनु का जन्म लगभग 6673 ईसा पूर्व में हुआ था। मनु ब्रह्रााजी के पौत्र कश्यप की संतान थे। बाद में मनु के 10 पुत्र हुए जिनमें- इल, इक्ष्वाकु, कुशनाम, अरिष्ट, धृष्ट, नरिष्यंत, करुष, महाबली, शर्याति और पृषध थे। इक्ष्वाकु कुल में कई प्रतापी राजा, मुनि और भगवान हुए है। इक्ष्वाकु कुल में भगवान राम का जन्म हुआ था। 

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अयोध्या की स्थापना कैसे हुई ? 
स्कंद पुराण के अनुसार जिस तरह से काशी भगवान शिव के त्रिशूल पर टिकी है उसी प्रकार अयोध्या भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र पर विराजमान है। पौराणिक कथा के अनुसार मनु ने ब्रह्रााजी से अपने लिए एक नगर के निर्माण की बात को लेकर उनके पास पहुंचे तब ब्रह्रााजी जी उन्हें भगवान विष्णु के पास भेजा। तब भगवान विष्णु ने मनु के लिए साकेतधाम का चयन किया। साकेतधाम के चयन के बाद ब्रह्रााजी और मनु के साथ विष्णुजी ने देवताओं के शिल्पकार विश्वकर्मा को भेज दिया। विष्णु जी ने महर्षि वशिष्ठ को भी भेजा। वशिष्ठ मुनि ने सरयू नदी के किनारे लीला भूमि का चयन किया। भूमि चयन के बाद देवशिल्पी नगर के निर्माण की प्रकिया आरंभ की। रामायण में अयोध्या का जिक्र कौशल जनपद के रूप में भी किया गया। भगवान राम के जन्म के समय इस नगर का नाम अवध के रूप जाना जाता था। अयोध्या का एक नाम साकेत भी है। अयोध्या के अलावा कपिलवस्तु, वैशाली, मिथिला और कौशल में इक्ष्वाकु वंश के शासकों ने राजपाठ चलाया।  

सभी प्राचीन सप्तपुरियां और उनका महत्व
मथुरा
मथुरा यमुना नदी के किनारे बसा हुआ है। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में हुआ था। श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के अवतार थे। मथुरा का काफी धार्मिक महत्व है।
उज्जैन
उज्जैन को उज्जयिनी और अवंतिका के नाम से भी जाना जाता है। यह नगर शिप्रा नदी के किनारे बसा हुआ है। यहां पर ज्योतिर्लिंग महाकालेश्व स्थित है और प्रत्येक 12 वर्ष में कुंभ लगता है।
काशी
हिंदू धर्म में काशी का विशेष महत्व है। यह भगवान शिव की नगरी है। यह गंगा नदी के किनारे पर बसा है। यह सप्तपुरियों में से एक है। भोले भंडारी की इस नगरी में काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग स्थित है।
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हरिद्वार
हरिद्वार भी एक प्रमुख धार्मिक नगरी है। हरिद्वार भी सप्तपुरियों में एक है। यह पर भी प्रयाग की भांति कुंभ मेला लगता है।
द्वारिका धाम
द्वारिका धाम गुजरात में स्थित है। यह भगवान श्रीकृष्ण का धाम है। यह नगर समुद्र के किनारे स्थित है। द्वारिका धाम भी सप्तपुरियों में एक है।
कांचीपुरम
कांचीपुरम का संबंध देवी पार्वती से है। यह वेगवदी नदी के किनारे बसा हुआ है। कांचीपुरम में बहुत ही धार्मिक स्थल और मंदिर है। यह भी सप्तपुरियों में से एक है।
अयोध्या 
अयोध्या भगवान श्रीराम की जन्मस्थली है। यह धार्मिक नगर सरयू नदी के किनारे बसा हुआ है। अयोध्या नगरी की स्थापना राजा मनु ने किया।
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