इस दौर में अहिंसा के व्रत का पालन किए जाने की सबसे ज्यादा जरूरत है।
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अहिंसा का भाव
महावीर स्वामी अहिंसा के पुजारी थे उनका मानना था कि इस सृष्टि में जितने भी त्रस जीव (एक, दो, तीन, चार और पाँच इंद्रिय वाले जीव) आदि की हिंसा नहीं करनी चाहिए। उन्हें अपने रास्ते पर जाने से नहीं रोकना चाहिए। उन सब के प्रति समानता व प्रेम का भाव रखना चाहिए, साथ ही उनकी रक्षा करनी चाहिए। इस दौर में अहिंसा के व्रत का पालन किए जाने की सबसे ज्यादा जरूरत है क्योंकि कोरोना वायरस जैसी महामारी भी एक हद तक प्रकृति और जानवरों के साथ की गई हिंसा का ही परिणाम है।
भगवान महावीर का दूसरा सिद्धांत है सत्य-इसके बारे में उनका कहना है कि मनुष्य को सत्य का मार्ग जरूर अपनाना चाहिए।
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सदा सच बोलो
भगवान महावीर का दूसरा सिद्धांत है सत्य-इसके बारे में उनका कहना है कि मनुष्य को सत्य का मार्ग जरूर अपनाना चाहिए किसी भी स्थिति में झूठ का सहारा नहीं लेना चाहिए। सत्य के संबंध में कहा कि जो बुद्धिमान मनुष्य सत्य की ही आज्ञा में रहता है वह मृत्यु को तैरकर पार कर जाता है।भारत में इतना ज्यादा कोरोना फैलने का एक बहुत बड़ा कारण झूठ भी था क्योंकि बहुत लोग संक्रमित होने के बावजूद भी इस बात को सबसे छिपाकर रखते थे।इसलिए भगवान महावीर के सदेशों से प्रेरणा लेते हुए आपको सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए क्यों कि इसी में आपकी,आपके परिवार और देश की भलाई है।
भगवान महावीर का तीसरा सिद्धांत है अपरिग्रह।
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अपरिग्रह
भगवान महावीर का तीसरा सिद्धांत है अपरिग्रह। अपरिग्रह के बारे में उनका कहना है कि जो मनुष्य निर्जीव चीजों या आवश्यकता से अधिक वस्तुओं का संग्रह करता है अथवा वह दूसरों से ऐसा संग्रह करवाता है या दूसरों को ऐसा संग्रह करने की सलाह देता है। ऐसे व्यक्ति को दुखों से कभी भी छुटकारा नहीं मिल सकता है।जगत के कल्याण हेतु भगवान महावीर ने ये संदेश अपरिग्रह के माध्यम से दुनिया को देना चाहा। सुखी और शांति भरा जीवन जीने के लिए जितना आपको जरूरत है उतना ही संचय कीजिए।
अस्तेय का पालन करने वाले किसी भी रूप में अपने मन के मुताबिक वस्तु ग्रहण नहीं करते हैं अर्थात ऐसे लोग जीवन में हमेशा संयम से रहते हैं।
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अस्तेय
भगवान महावीर का चौथा सिद्धांत है अस्तेय। अस्तेय का पालन करने वाले किसी भी रूप में अपने मन के मुताबिक वस्तु ग्रहण नहीं करते हैं अर्थात ऐसे लोग जीवन में हमेशा संयम से रहते हैं और सिर्फ वही वस्तु लेते हैं जो उन्हें दी जाती है।अस्तेय का मतलब है चोरी नहीं करना लेकिन चोरी का अर्थ सिर्फ भौतिक वस्तुओं की चोरी नहीं है बल्कि चोरी का अर्थ खराब नीयत भी है यानि जब आप दूसरे की सफलताओं से विचलित हो जाएं या फिर उन्हें हराने के लिए अनैतिक तरीके अपनाने लगें तब भी वह एक प्रकार की चोरी है।
ब्रह्मचर्य का अर्थ है अपनी आत्मा में लीन हो जाना या अपने अंदर छिपे ब्रह्म को पहचानना।
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ब्रह्मचर्य
महावीर स्वामी ब्रह्मचर्य के बारे में अपने बहुत ही अमूल्य उपदेश देते हैं कि ब्रह्मचर्य उत्तम तपस्या, नियम, ज्ञान, दर्शन, चारित्र, संयम और विनय की जड़ है। तपस्या में ब्रह्मचर्य श्रेष्ठ तपस्या है। ब्रह्मचर्य का अर्थ है अपनी आत्मा में लीन हो जाना या अपने अंदर छिपे ब्रह्म को पहचानना। बाहर के लोग आपको अशांत करते हैं इसलिए यदि आप दुनिया की परवाह छोड़कर सिर्फ अपने मन की शांति की दिशा में काम करेंगे तो आप ब्रह्मचारी कहलाएंगे।