मोक्ष प्रदान करने वाला माघ स्नान,पौष पूर्णिमा से आरम्भ होकर माघ पूर्णिमा को समाप्त होता है। माघ मास का स्नान कुछ इलाकों में तो सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में आते ही यानी मकर संक्रांति के दिन से शुरू होता है ,लेकिन अधिकतर स्थानों पर इसकी शुरुआत पौष पूर्णिमा के दिन से होती है।
Magh Month 2024: माघ मास में जब सूर्य मकर राशि पर जाते हैं तब सब लोग तीर्थराज प्रयाग को आते हैं। देवता, दैत्य, किन्नर और मनुष्यों के समूह सब आदरपूर्वक त्रिवेणी में स्नान करते हैं। स्नान और दान कर पुण्य अर्जित करने के लिए माघ का महीना बहुत ही उत्तम माना गया है। मोक्ष प्रदान करने वाला माघ स्नान, पौष पूर्णिमा से आरम्भ होकर माघ पूर्णिमा को समाप्त होता है। माघ मास का स्नान कुछ इलाकों में तो सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में आते ही यानी मकर संक्रांति के दिन से शुरू होता है ,लेकिन अधिकतर स्थानों पर इसकी शुरुआत पौष पूर्णिमा के दिन से होती है।
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कल्पवास का महत्व
पौष पूर्णिमा से माघ पूर्णिमा तक एक माह का कल्पवास होता है। इस साल 25 जनवरी को पौष पूर्णिमा है, उस दिन से कल्पवास शुरू हो जाएगा। माघ मास के समय संगम के तट पर निवास को ही कल्पवास कहा जाता है। संयम,अहिंसा और श्रद्धा ही कल्पवास का मूल आधार होता है। धर्मराज युधिष्ठिर ने महाभारत युद्ध के दौरान मारे गए अपने रिश्तेदारों को सदगति दिलाने हेतु मार्कण्डेय ऋषि के कहने पर कल्पवास किया था।
माघ मास की महिमा
माघ मास की ऐसी ही महिमा है कि इसमें जहां कही भी जल हो, वह गंगाजल के सामान ही होता है, फिर भी प्रयाग, कुरुक्षेत्र ,हरिद्धार, काशी, नासिक, उज्जैन और अन्य पवित्र तीर्थों और नदियों में स्नान का बड़ा महत्व है। माघ स्नान करने वाले मनुष्यों पर भगवान विष्णु प्रसन्न रहते है और उन्हें सुख-सौभाग्य, धन-संतान और मोक्ष प्रदान करते है। यदि सकाम भाव से माघ स्नान किया जाय तो उससे मनोवांछित फल की सिद्धि होती है और निष्काम भाव से स्नान आदि करने पर वह मोक्ष देने वाला होता है ऐसा शास्त्रों में कहा गया है। मत्स्य पुराण में वर्णन आया है कि माघ के महीने में गंगा, यमुना, सरस्वती के संगम में स्नान करने से दस तीर्थों के साथ सहस्त्र कोटि तप का पुण्य प्राप्त होता है। ऐसे पुण्य क्षेत्र में जो स्नान दान आदि के फल हैं वे अन्य कहीं नहीं प्राप्त हो सकते हैं। इसी कारण यह विश्व में अन्य तीर्थों से सबसे विशिष्ट तीर्थ माना गया है। मत्स्य पुराण का कथन है कि माघ मास में जो व्यक्ति ब्रह्मवैवर्त पुराण का दान करता है उसे ब्रह्म लोक की प्राप्ति होती है।
माघ माह के व्रत-त्योहार
माघ माह के दौरान कृष्ण पक्ष में सकट चौथ (गणेश चतुर्थी व्रत ) षटतिला एकादशी और मौनी अमावस्या आती है तो शुक्ल पक्ष में वरदतिलकुन्द-विनायक चतुर्थी, वसंत पंचमी, शीतला षष्ठी, रथ-अचला सप्तमी, जया एकादशी व्रत और माघी पूर्णिमा जैसे पर्व आते है। मकर संक्रांति 14 जनवरी से ही देवों के दिन शुरू होते है,उत्तरायण शुरू होता है। गंगापुत्र भीष्म ने अपनी देह का त्याग उत्तरायण में किया था।