स्वास्तिक के दाएं-बाएं शुभ-लाभ लिखने से वहां के वास्तु दोष दूर होते हैं।
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भगवान गणेश देवों के देव भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र हैं। श्री गणेश समृद्धि, बुद्धि और सफलता देने वाले और जीवन से बाधाओं को दूर करने वाले देवता माने जाते हैं। बुधवार का दिन गणेशजी को समर्पित है व इस दिन पूरे विधि विधान के साथ भगवान गणेश की पूजा की जाती है। गणेशजी भक्तों पर प्रसन्न होकर उनके दुखों को हरते हैं और सभी मनोरथों को पूर्ण करते हैं। भगवान गणेश स्वयं रिद्धि-सिद्धि के दाता और शुभ-लाभ के प्रदाता हैं। यदि वह प्रसन्न हो जाएं तो अपने भक्तों की बाधा, सकंट, रोग-दोष तथा दरिद्रता को दूर करते हैं। आपने देखा होगा कि अक्सर लोग अपने घर के मुख्य दरवाजे के बाहर या फिर गणेशजी के पूजन के समय शुभ-लाभ लिखते हैं। यह क्यों लिखते हैं? और क्या है इनका भगवान गणेशजी से संबंध जानते हैं।
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गणेशजी के दो पुत्र हैं शुभ और लाभ
शास्त्रों के अनुसार भगवान भोलेनाथ के पुत्र गणेशजी का विवाह प्रजापति विश्वकर्मा की पुत्री ऋद्धि और सिद्धि नामक दो विदुषी कन्याओं से हुआ था। सिद्धि से 'क्षेम'(शुभ) और ऋद्धि से 'लाभ' नाम के दो पुत्र हुए। लोकभाषा में इन्हें ही शुभ-लाभ के नाम से जाना जाता है। गणेश पुराण के अनुसार शुभ और लाभ को केशं और लाभ नामों से भी जाना जाता है वहीं रिद्धि शब्द का भावार्थ है 'बुद्धि' जिसे हिंदी में शुभ कहते हैं। सिद्धी शब्द का मतलब होता है 'आध्यात्मिक शक्ति' की पूर्णता यानी 'लाभ'।
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ज्योतिष की दृष्टि में भी चौघड़िया या मुहूर्त देखते समय उसमें अमृत के अलावा लाभ और शुभ को ही महत्वपूर्ण माना जाता है। गणेश पुराण में कहा गया है कि स्वास्तिक गणेशजी का ही स्वरूप है, इसलिए सभी शुभ,मांगलिक और कल्याणकारी कार्यों में इसकी स्थापना अनिवार्य है। इसमें सारे विघ्नों को हरने और अंमगल दूर करने की शक्ति निहित है। घर के मुख्य दरवाजे पर 'स्वास्तिक' मुख्य द्वार के ऊपर मध्य में और शुभ और लाभ बाईं और दाईं तरफ लिखते हैं। स्वास्तिक की दोनों अलग-अलग रेखाएं गणपति जी की पत्नी रिद्धि-सिद्धि को दर्शाती हैं। घर के बाहर शुभ-लाभ लिखने का मतलब यही है कि घर में सुख और समृद्धि सदैव बनी रहे। लाभ लिखने का भाव यह है कि भगवान से लोग प्रार्थना करते हैं कि उनके घर की आय और धन हमेशा बढ़ता रहे, लाभ प्राप्त होता रहे।
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वास्तु दोष होगा दूर
स्वास्तिक के दाएं-बाएं शुभ-लाभ लिखने से वहां के वास्तु दोष दूर होते हैं। यदि आपके घर में या व्यावसायिक स्थल पर किसी प्रकार का कोई वास्तुदोष है तो यहां की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करने के लिए पूर्व,उत्तर-पूर्व या उत्तर दिशा में शुभ-लाभ सहित स्वास्तिक का चिन्ह बनाना चाहिए। इसकी जगह आप अष्टधातु या तांबे का स्वास्तिक भी लगा सकते हैं।अपने बच्चों का ध्यान पढ़ाई में लगाने के लिए पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में स्वास्तिक बनाएं और शुभ-लाभ लिखें ।यह उनकी शिक्षा में अच्छा प्रदर्शन एवं सभी विघ्नों को दूर कराने में सहायक होगा।
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