10 सितंबर, शुक्रवार को विनायक चतुर्थी है। इसे कलंक चतुर्थी, गणेश चौथ, डंडा चौथ और शिवा चतुर्थी भी कहा जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार केवल इसी चतुर्थी को चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए, क्योंकि इस दिन चंद्र दर्शन करने से झूठा कलंक लगता है।
Ganesh Chaturthi 2021: 10 सितंबर, शुक्रवार को विनायक चतुर्थी है। इसे कलंक चतुर्थी, गणेश चौथ, डंडा चौथ और शिवा चतुर्थी भी कहा जाता है।
- फोटो : अमर उजाला
10 सितंबर, शुक्रवार को विनायक चतुर्थी है। इसे कलंक चतुर्थी, गणेश चौथ, डंडा चौथ और शिवा चतुर्थी भी कहा जाता है। धर्मग्रंथों के अनुसार केवल इसी चतुर्थी को चंद्रमा के दर्शन नहीं करने चाहिए, क्योंकि इस दिन चंद्र दर्शन करने से झूठा कलंक लगता है। श्री मदभागवत के अनुसार इस दिन चांद देखने से ही भगवान श्रीकृष्ण को स्यमंतक मणि चुराने का मिथ्या कंलक लगा था जिससे मुक्ति पाने के लिए उन्होंने विधिवत गणेश चतुर्थी का व्रत किया था।
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क्यों नहीं देखते हैं इस दिन चंद्रमा
इस संबंध में एक पौराणिक कथा प्रचलित है कि जब भगवान गणेश को गज का मुख लगाया गया तो वे गजानन कहलाए और माता-पिता के रूप में पृथ्वी की सबसे पहले परिक्रमा करने के कारण अग्रपूज्य हुए। सभी देवताओं ने उनकी स्तुति की पर चंद्रमा मंद-मंद मुस्कुराते रहें उन्हें अपने सौंदर्य पर अभिमान था। गणेशजी समझ गए कि चंद्रमा अभिमान वश उनका उपहास कर रहे हैं। क्रोध में आकर भगवान श्रीगणेश ने चंद्रमा को श्राप दे दिया कि आज से तुम काले हो जाओगे। चंद्रमा को अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने श्रीगणेश जी से क्षमा मांगी तो गणेश जी ने कहा कि सूर्य के प्रकाश को पाकर तुम एक दिन पूर्ण हो जाओगे यानी पूर्ण प्रकाशित होंगे। लेकिन चतुर्थी का यह दिन तुम्हें दण्ड देने के लिए हमेशा याद किया जाएगा। इस दिन को याद कर कोई अन्य व्यक्ति अपने सौंदर्य पर अभिमान नहीं करेगा। जो कोई व्यक्ति भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी के दिन तुम्हारे दर्शन करेगा, उस पर झूठा आरोप लगेगा।
यदि दर्शन हो जाए तो क्या करें
लेकिन यदि गणेश चतुर्थी को चंद्र दर्शन हो जाये तो कलंक चतुर्थी की कृष्ण-स्यमंतक कथा को पढ़ने या सुनने पर गणेशजी क्षमा कर देते हैं। कलंक के दोष से बचने के लिए हर दूज का चाँद देखना भी जरूरी है। चतुर्थी पर चंद्र दर्शन हो जाए तो इस मंत्र को जपने से भी कलंक नहीं लगता है।
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सिंहः प्रसेन मण्वधीत्सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमार मा रोदीस्तव ह्मेषः स्यमन्तकः।।
ऐसे करें गणेशजी की पूजा
गणेशजी के पूजन के समय प्रसाद के लिए बेसन या बूंदी के लड्डू या गुरधानी का प्रयोग किया जा सकता है। धूप, दीप, लालचन्दन, मोली, चावल, पुष्प, दूर्वा, जनेऊ, सिन्दूर,आदि से भक्तिभाव से गणेश जी का पूजन करना चाहिए। गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करने से गणेशजी शीघ्र प्रसन्न होते हैं ।कष्टों से निवारण और शत्रु बाधा से बचने के लिए 'ॐ गं गणपतये नमः' का पाठ करना उत्तम रहता है।धान की खील से पूजा करना मान-सम्मान दिलाने वाला है,वहीँ धन वृद्धि के लिए गणेशजी के साथ लक्ष्मी कीपूजा प्रत्येक शुक्रवार को करनी चाहिए। सुख-समृद्धि व संतान प्राप्ति के लिए गणेशजी पर प्रत्येक बुधवार को सिन्दूर चढ़ाना शुभ होता है। गणेशजी के पूजन व आरती के समय उनके पिता भगवान शिव, माता पार्वती, भाई कार्तिकेय,दोनों पत्नी रिद्धि व सिद्धि तथा दोनों पुत्र लाभ व क्षेम का ध्यान भी अवश्य करना चाहिए। पूजा-आरती के उपरांत चांदी या लकड़ी के डंडे अवश्य बजाने चाहिए।