1. जन्मदिन पर अभ्यंग स्नान कर नए वस्त्र पहनें- जन्मदिन पर अभ्यंग स्नान वस्त्र पहने हुए ही करें। स्नान करते समय ऐसा भाव रखें कि, स्नान का जल निर्मल व शुद्ध गंगा के रूप में हमारे शरीर पर प्रवाहित हो रहा है और उससे हमारे देह एवं अंत:करण की शुद्धि हो रही है। स्नान के पश्चात नए वस्त्र धारण करें। उसके उपरान्त माता-पिता एवं अन्य ज्येष्ठ व्यक्तियों को प्रणाम करें। ज्येष्ठों के प्रति आदर भाव उत्पन्न होने से उसके मन की मलिनता नष्ट होती है। इसके उपरांत कुलदेवता का अभिषेक करें अथवा उनकी भावपूर्ण पूजा करें एवं संभव हो तो उनका अभिषेक करें। उपरांत कुलदेवता का कम से कम तीन माला नामजप करें।
2. जिसका जन्मदिन है उसकी आरती उतारें। (उसकी घी के दीप से आरती उतारें)- जिसका जन्म दिन है, उसका औक्षण करें। औक्षण करवाने वाला एवं करने वाला, दोनों में यह भाव रहे कि, एक दूसरे के माध्यम से प्रत्यक्ष ईश्वर ही यह कृति स्वरूप कार्य द्वारा हमें आशीर्वाद दे रहे हैं। कुलदेवता अथवा उपास्य देवता का स्मरण कर अक्षत तीन बार जीव के सिर पर डालें। जिसका जन्मदिन है उसे मिठाई अथवा कोई मीठा पदार्थ खिलाएं। उसकी मंगलकामना के लिए प्रार्थना करें। उसे कुछ भेंट वस्तु दें; परंतु वह देते समय अपेक्षा अथवा कर्तापन न लें।
3. भेंट वस्तु स्वीकारते समय यह ईश्वर से मिला हुआ प्रसाद है ऐसा भाव रखें - जिसका जन्मदिन है,उसे कुछ भेंट वस्तु देनी चाहिए। इस विषय में आगे दिए अनुसार दृष्टिकोण रखें। छोटे बालक को प्रोत्साहित करने के लिए भेंट दें, बडों को भेंट देने में कर्त्तापन न रखें। अपेक्षा रहित दान करने से हम कुछ कालोपरांत उसके बारे में भूल भी जाते हैं। दान के विषय में कर्त्तापन अथवा अपेक्षा रखने से लेन-देन का हिसाब निर्माण होता है। दान अथवा भेंट स्वीकारने वाला व्यक्ति यदि ऐसा भाव रखे कि,यह ईश्वर कृपा से मिला प्रसाद है तो लेन-देन का हिसाब निर्माण नहीं होता। जन्मदिन पर जिन वस्त्रों को धारण कर स्नान किया जाता है, उन वस्त्रों का स्वयं उपयोग न कर अपेक्षा रहित किसी को दान देना चाहिए।
1. शास्त्रों के अनुसार कुछ निषिद्ध कृतियां- जन्मदिन पर नाखून एवं बाल काटना, वाहन से यात्रा करना, कलह, हिंसा धर्म, अभक्ष्य भक्षण (न खाने योग्य पदार्थ खाना), अपेयपान (न पीने योग्य पदार्थ पीना), स्त्री संसर्ग (स्त्री के साथ शारीरिक संबंध) इत्यादि कृतियों से प्रयत्नपूर्वक बचें।
2. जन्मदिन पर प्रज्वलित किए गए दीपक को न बुझाएं- प्रज्वलित दीपक का बुझना आकस्मिक मृत्यु, अर्थात् अपमृत्यु से संबंधित है, इसलिए इसे अशुभ माना गया है।
3. जन्मदिन की शुभकामनाएं रात्रि के 12 बजे न देकर सूर्योदय उपरांत देना- पश्चिमी संस्कृति का अनुकरण कर अनेक लोग जन्मदिन की शुभकामनाएं रात्रि 12 बजे देते हैं। रात्रि के 12 बजे वातावरण में रज-तम कणों की मात्रा अधिक होती है, इसलिए उस समय दी गई शुभकामनाएं फलदायी नहीं होती हैं। हिंदू संस्कृति के अनुसार दिन सूर्योदय से आरंभ होता है। यह समय ऋषि-मुनियों की साधना का समय है, इसलिए वातावरण में सात्त्विकता अधिक होती है और सूर्योदय के पश्चात् दी गई शुभकामनाएं फलदायी सिद्ध होती हैं। अत: जन्मदिन की शुभकामनाएं सूर्योदय के पश्चात् ही दें।
4. मोमबत्ती जलाकर जन्म दिन न मनाएं - पश्चिमी संस्कृति का अंधानुकरण कर अनेक लोग मोमबत्तियां जलाकर और केक काटकर जन्मदिन मनाते हैं। मोमबत्ती तमोगुणी होती है, उसे जलाने से कष्टदायक स्पंदन प्रक्षेपित होते हैं। उसी प्रकार हिंदू धर्म में ज्योत बुझाने की कृति अशुभ एवं त्यागने योग्य मानी गई है। इसलिए जन्मदिन पर मोमबत्ती जलाने के उपरांत उसे जानबूझ कर न बुझाएं।
5. केक काटकर जन्मदिन न मनाएं- केक पर छुरी चलाना अशुभ क्रिया का प्रतीक है। इसलिए जन्मदिन के शुभ अवसर पर ऐसी कृति से आगे की पीढ़ी पर कुसंस्कार आते हैं। आरती के पश्चात आकृष्ट ईश्वरीय चैतन्य को ग्रहण करते समय ऐसे विधि कर्म करना, उस चैतन्य में कष्टदायक स्पंदनों द्वारा बाधा उत्पन्न करने के समान है। किसी भी शुभ अवसर पर जानबूझ कर इस प्रकार की लयकारी विधि करना धर्म विघातक प्रवृत्ति का लक्षण है।
6. संतों का जन्मदिन- संतों का जन्मदिन उनकी जन्मतिथि पर न मनाएं, जिस दिन उन्हें गुरु प्राप्ति हुई हो उस दिन मनाएं, क्योंकि उस दिन एक प्रकार से उनका पुनर्जन्म होता है। वह दिन प्रकटदिन के रूप में मनाया जाता है।
संदर्भ : सनातन संस्था का ग्रंथ ‘पारिवारिक धार्मिक कृतियों का अध्यात्मशास्त्रीय आधार’