धीरज धरम मित्र अरु नारी
आपद काल परखिये चारी॥
इस चौपाई का अर्थ है कि धीरज, धर्म और मित्र व नारी, इन चारों की परख विपत्ति के समय ही होती है।
जा पर कृपा राम की होई ।
ता पर कृपा करहिं सब कोई ॥
जिनके कपट, दम्भ नहिं माया ।
तिनके हृदय बसहु रघुराया ॥
इसका अर्थ है जिन पर प्रभु श्री राम की कृपा होती है, उन्हें कोई सांसारिक दुःख छू नहीं सकता। जिन लोगों पर परमात्मा की कृपा हो जाती है उस पर तो सभी की कृपा बनी ही रहती हैं। जिसके अंदर कपट, झूठ और माया नहीं होती, उन्हीं के हृदय में रघुपति राम बसते हैं। साथ ही उनके ऊपर प्रभु की कृपा सदैव होती
होइहि सोइ जो राम रचि राखा ।
को करि तर्क बढ़ावै साखा ॥
अस कहि लगे जपन हरिनामा ।
गईं सती जहँ प्रभु सुखधामा ॥
अर्थ है कि जो कुछ भी संसार में राम ने रच रखा है, वही होगा। इसलिए इस विषय में तर्क करने का कोई लाभ नहीं होगा। ऐसा कहकर भगवान शिव हरि का नाम जपने लगे और सती वहां गईं जहां सुख के धाम प्रभु राम थे।
हरि अनंत हरि कथा अनंता ।
कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता ॥
रामचंद्र के चरित सुहाए ।
कलप कोटि लगि जाहिं न गाए ॥
इसका अर्थ है कि हरि अनंत हैं उनका कोई पार नहीं पा सकता है। उनकी कथा भी अनंत ही है। सभी संत लोग उस कथा को बहुत प्रकार से कहते-सुनते हैं। साथ ही ये पक्तिंया कहती हैं कि भगवान श्री रामचंद्र के सुंदर चरित्र का कोई बखान नहीं कर सकता क्योंकि सुंदर चरित्र करोड़ों कल्पों में भी गाए नहीं जा सकते।
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