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Shani Pradosh Vrat: शनि प्रदोष व्रत आज, जानें पूजा विधि और मुहूर्त

Sat, 06 Apr 2024 07:33 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shani Pradosh Vrat 2024: त्रयोदशी व्रत अगर शनिवार के दिन हो तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। वैसे प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव शंकर की पूजा की जाती है, लेकिन अगर प्रदोष व्रत शनिवार के दिन होता है तो इस दिन शिव जी के साथ साथ शनि देव की पूजा भी की जाती है। 
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शनि प्रदोष व्रत 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Shani Pradosh Vrat 2024: अप्रैल माह का पहला प्रदोष व्रत 6 अप्रैल, दिन शनिवार को है। पंचांग के अनुसार यह व्रत हर महीने में दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। अप्रैल में पहली त्रयोदशी तिथि शनिवार के दिन पड़ रही है, जिसे बहुत खास माना जा रहा है। त्रयोदशी तिथि अगर शनिवार के दिन हो तो इसे शनि प्रदोष व्रत कहा जाता है। वैसे तो प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव शंकर की पूजा की जाती है, लेकिन अगर प्रदोष व्रत शनिवार के दिन होता है तो इस दिन शिव जी के साथ शनि देव की पूजा भी की जाती है। इस व्रत को करने से शिव शंभू के साथ शनि देव भी प्रसन्न होते हैं और कुंडली से शनि दोष दूर होता है। ऐसे में चलिए जानते हैं शनि प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में...

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शनि प्रदोष व्रत 2024 शुभ मुहूर्त 
इस बार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 06 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 19 मिनट से होगी। इसका समापन 07 अप्रैल को सुबह 06 बजकर 53 मिनट पर होगा। प्रदोष व्रत के दिन संध्याकाल में शिव की पूजा करने का विधान है। ऐसे में 06 अप्रैल को शनि प्रदोष व्रत रखा जाएगा। 

शनि प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • शनि प्रदोष व्रत वाले दिन पूजा के लिए प्रदोष काल यानी शाम का समय शुभ माना जाता है। 
  • सूर्यास्त से एक घंटे पहले, भक्त स्नान करें और पूजा के लिए तैयार हो जाएं। 
  • स्नान के बाद संध्या के समय शुभ मुहूर्त में पूजन आरंभ करें। 
  • गाय के दूध, दही, घी, शहद और गंगाजल आदि से शिवलिंग का अभिषेक करें। 
  • फिर शिवलिंग पर श्वेत चंदन लगाकर बेलपत्र, मदार, पुष्प, भांग, आदि अर्पित करें।
  • फिर विधिपूर्वक पूजन और आरती करें। 

शनि प्रदोष व्रत का महत्व

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शनि प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव के साथ शनि महाराज भी प्रसन्न होते हैं। शनि प्रदोष व्रत करने से मनुष्य को लंबी आयु के साथ सुख-समृद्धि की भी प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी दुख दूर हो जाते हैं और अंत में वह सभी सुखों को भोगकर मोक्ष प्राप्त करता है।

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