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Bhai dooj 2021: बहन का आतिथ्य स्वीकार करने से मिलता है दीर्घायु का वरदान,पढ़ें भाई दूज की कथा

Sun, 31 Oct 2021 04:38 PM IST
शशि सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
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bhai dooj 2021 - फोटो : file photo
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हिंदू पंचांग के अनुसार दिवाली के दो दिन बाद यानी कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। इस बार भाई-बहन के पावन प्रेम का प्रतीक भाई दूज का त्योहार 06 नवंबर 2021 दिन शनिवार को मनाया जाएगा। इस दिन भाई अपनी बहन का आतिथ्य स्वीकार करते हैं तो बहने भाई की भावविभोर होकर आवभगत करती हैं। भाई दूज पर बहनें भाई के माथे पर तिलक करके उनके सुखमय जीवन, उज्जवल भविष्य और लंबी आयु की कामना करती हैं। तो भाई भी अपने कर्तव्य के निर्वहन का संकल्प लेते हैं। मान्यता है कि इस दिन जो भाई अपनी बहन का आतिथ्य स्वीकार करते हैं उन्हें अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। भाई दूज के पर्व की पावन कथा सूर्य देव पुत्र यम और यमुना से जुड़ी हुई है। तो चलिए जानते हैं भाई-बहन के पावन प्रेम की भाई दूज कथा।

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शास्त्रों के अनुसार सूर्यदेव और पत्नी संज्ञा की दो संतानें थीं- एक पुत्र यमराज और दूसरी पुत्री यमुना। संज्ञा सूर्य का तेज सहन नहीं कर पा रही थी जिसके कारण अपनी छायामूर्ति का निर्माण किया और अपने पुत्र-पुत्री को सौंपकर वहां से चली गई। यम और यमुना दोनों भाई बहनों में बहुत प्रेम था। जानते हैं आगे की कथा...
 
यमदेव अपनी बहन यमुना से बहुत प्रेम करते थे लेकिन काम की व्यस्तता के कारण अपनी बहन से मिलने नहीं जा पाते थे। एक दिन यम ने अपनी व्यस्तता से समय निकालकर अपनी बहन से मिलने का मन बनाया। जब यम देव अपनी बहन यमुना के घर पहुंचे तो उन्हें देखकर यमुना खुशी से प्रफुल्लित हो उठीं। जिसके बाद भाव विभोर होकर यमुना ने अपने भाई के लिए तरह-तरह व्यंजन बनाए और उनका आदर सत्कार किया। अपने प्रति बहन का इतना प्रेम देखकर यमराज को अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने यमुना को खूब सारी भेंटें दीं।
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जब चलने का समय हुआ तो विदा लेते समय यमराज ने अपनी बहन यमुना से कहा कि अपनी इच्छा का कोई वरदान मांग लो। तब यमुना ने अपने भाई के इस आग्रह को सुनकर कहा कि,अगर आप मुझे कोई वर देना ही चाहते हैं तो यही वर दीजिए कि आज के दिन हर साल आप मेरे यहां आएंगे और मेरा आतिथ्य स्वीकार करेंगे और जो भी भाई इस दिन अपनी बहन का आतिथ्य स्वीकार करेंगे उन्हें अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। कहते हैं कि इसी के उपलक्ष्य में हर वर्ष भाईदूज का त्योहार मनाया जाता है। इसलिए मान्यता है कि इस दिन बहन का आतिथ्य स्वीकार करने वालों को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है और यही कारण है कि इस दिन को यम द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।
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