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Bhai Dooj 2021: जानिए क्यों यम द्वितीया के दिन यमुना में स्नान करने से नहीं झेलनी पड़ती यमराज की यातना ?

Sat, 06 Nov 2021 09:39 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

धार्मिक मान्यता के अनुसार भाईदूज या यम द्वितीया के दिन भाई-बहन का साथ-साथ यमुना नदी में स्नान करने का बहुत महत्व है। इस दिन भाई-बहन हाथ पकड़कर यमुना में डुबकी लगाते हैं।
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भाई दूज की शुभकामनाएं - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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धार्मिक मान्यता के अनुसार भाईदूज या यम द्वितीया के दिन भाई-बहन का साथ-साथ यमुना नदी में स्नान करने का बहुत महत्व है। इस दिन भाई-बहन हाथ पकड़कर यमुना में डुबकी लगाते हैं। शास्त्रों के अनुसार ऐसा करने से यम की फांस और पापों से मुक्ति मिलती है। इसी मान्यता के साथ यम और यमुना का पूजन कर विश्रामघाट पर भाई-बहन स्नान करते हैं और धर्मराज-यमुनाजी के मंदिर के दर्शन करते हैं। यमुना नदी के पवित्र जल में डुबकी लगाने के बाद दोपहर में बहन के घर जाकर भोजन करके कुछ उपहार दिया जाता है। इस दिन बहन के घर भोजन करने और उसे भेंट देकर खुश करने से भाई के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। यदि अपनी सगी बहन न हो तो ममेरी, फुफेरी या मौसेरी बहनों को उपहार देकर ईश्वर का आर्शीवाद प्राप्त कर सकते हैं। जो भाई इस दिन अपनी बहन के हाथ का बना हुआ भोजन करता है, उसे धर्म, धन, अर्थ, आयुष्य और अनेकों प्रकार के सुख मिलते हैं।
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यम द्वितीया से जुड़ी कथा
पौराणिक कथा के अनुसार भाई-बहन के इस पवित्र पर्व के कारक सूर्यदेव की पुत्री यमुना और पुत्र यमराज हैं। भगवान सूर्य देवता और उनकी पत्नी संज्ञा के एक पुत्र यम और पुत्री यमुना दो संतान थीं। देवी संज्ञा अपने पति सूर्यदेव के ताप को सहन कर सकें इसलिए वह सूर्यदेव के पास अपनी छाया को छोड़कर खुद तप करने चली गईं। देवी छाया से दो और संतानें ताप्ती और शनि का जन्म हुआ। छाया को यम और यमुना से किसी प्रकार का लगाव न था, किंतु यम और यमुना में बहुत प्रेम था। देवी छाया यम तथा यमुना से बुरा व्यवहार करने लगीं। इससे दुखी होकर यम ने यमपुरी नामक अपनी एक नई नगरी बसाई और वहां चले गए। यमपुरी में यम को पापियों को दण्ड देने का काम करते देखकर यमुनाजी गोलोक आ गईं। 

शास्त्रों के अनुसार यमुनाजी अपने भाई 'यम' से बड़ा स्नेह करतीं थीं, वे अपने भाई यम से बार-बार आग्रह करती कि वह उसके घर आयें और भोजन करें। चाहते हुए भी यमराज अपने काम में व्यस्त रहने के कारण बहन यमुना के घर नहीं जा पाते। बहुत समय बीत जाने पर एक दिन 'यम' को बहन यमुना की बहुत याद आई और उन्होंने बहन के घर जाने की ठान ली। यम ने अपने दूतों से यमुना को ढूंढ़ने के लिए कहा, लेकिन उन्हें तलाशने में दूत सफल नहीं रहे तब यमराज स्वयं ही गोलोक गए जहाँ विश्राम घाट पर यमुना जी से भेंट हुई, भाई को देखते ही यमुना ने भावविभोर होकर उनका बड़ा स्वागत सत्कार किया तथा उन्हें अनेकों प्रकार के परम स्वादिष्ट व्यंजन  भोजन में परोसे। इससे यमदेव बहुत प्रसन्न हुए और बहन से कहा-बहन ! आज तुम कोई भी मनोवांछित वर मांग लो, बहन यमुना के मन में कलयुग में जन कल्याण की चिंता हुई और उन्होंने कहा, भैया मुझे वरदान दो कि जो भाई-बहन यम द्वितीया के दिन मेरे जल में स्नान करें उन्हें यमलोक की कठोर यातनायें न सहन करनी पड़े।
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जनकल्याण के लिए अपनी बहन की ऐसी इच्छा देख यमदेव ने कहा,'तथास्तु ' ! ऐसा ही हो ! परन्तु जो भाई अपनी बहन का तिरस्कार करेंगें या उन्हें बार-बार अपमानित करेंगें उन्हें मैं यमपाश में बाँधकर यमपुरी ले जाऊँगा।लेकिन फिर भी यदि वह तुम्हारे जल में स्नान करके सूर्यदेव को अर्घ्य देगा तो उसे स्वर्गलोक में स्थान मिलेगा। जिस दिन मृत्यु के देवता यम यमुना से मिलने आए वह कार्तिक शुक्ल द्वितीया का दिन था, तभी से ऐसा माना जाने लगा कि जो भाई बहन इस दिन हाथ पकड़ कर यमुना में डुबकी लगाएंगे उन्हें नरक से मुक्ति मिल जाएगी।यही कारण है कि सदियों से भाई-बहन आज भी यानि भाई दूज के दिन यमुना नदी में एक साथ डुबकी लगाने के लिये आते हैं।
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