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तिब्बतियों के वोट पर अब किसने उठाए सवाल?

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गृह मंत्रालय ने चुनाव आयोग की ओर से तिब्बतियों को वोट का अधिकार देने पर कड़ी आपत्ति जताई है।
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मंत्रालय के मुताबिक देश में रहने वाले करीब दो लाख तिब्बतियों की हैसियत नागरिक की नहीं बल्कि शरणार्थी की है, लिहाजा उन्हें वोटिंग का अधिकार किसी भी सूरत में नहीं दिया जा सकता।

गृह मंत्रालय ने चुनाव आयोग और विदेश मंत्रालय को इस मामले पर रोक लगाने का निर्देश जारी किया है। दरअसल, चुनाव आयोग ने कर्नाटक हाईकोर्ट के एक फैसले के आधार पर तिब्बतियों को यह अधिकार दिया है।
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आयोग ने संबंधित निर्वाचन अधिकारियों को तिब्बतियों का नाम मतदाता सूची में डालने का आदेश जारी किया था। गृह मंत्रालय हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है।

अब सुर्पीम कोर्ट जाने की तैयारी

मंत्रालय ने इस मामले पर जल्द ही सुर्पीम कोर्ट में जाने की तैयारी कर ली है। इसके लिए रणनीति बनाई जा रही है। इस मामले से सीधे तौर पर जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आयोग को इस फैसले से पहले मंत्रालय को सूचित करना चाहिए था।

चुनाव आयोग ने इस मामले में अब तक कोई जवाब नहीं दिया है। तिब्बतियों के विदेशी मूल के होने की वजह से विदेश मंत्रालय को इस मामले में शामिल किया गया है।

यह पहला मौका है जब आयोग ने भारत में रह रहे शरणार्थी तिब्बतियों को वोट का अधिकार दिया है।

हिमाचल के धर्मशाला में शरणार्थी तिब्बतियों के धर्मगुरु दलाईलामा का निवास है। यहीं से ही निर्वासित तिब्बत सरकार भी चलती है।

हिमाचल में हैं 32 हजार तिब्बती

प्रदेश के अलग अलग जिलों में तिब्बतियों का निवास है। इनमें सबसे ज्यादा धर्मशाला और शिमला में रहते हैं।

निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डा. लोबसंग सांग्ये भी इस निर्वासित सरकार के कार्यालय में बैठते हैं। हिमाचल के धर्मशाला, शिमला आदि क्षेत्रों में लगभग 32 हजार तिब्बती रहते हैं।

जिला कांगड़ा में ही करीब 20 हजार शरणार्थी तिब्बती हैं। हालांकि, तिब्बत सरकार के प्रधानमंत्री डा. लोबसंग सांग्ये ने गृह मंत्रालय की चुनौती के विषय में कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया।
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तिब्बतियों को मोदी से उम्मीद

चीन को करारा जवाब देने में तिब्बतियों को नरेंद्र मोदी से उम्मीद नजर आ रही है। शिमला में मैक्मोहन लाइन की सौ साल याद को लेकर हुए सम्मेलन में तिब्बती और तिब्बत से जुडे़ संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

इसमें इन लोगों ने खुलकर नरेंद्र मोदी का नाम तो नहीं लिया, मगर संकेत-संकेत में वे जता गए कि देश में अब ऐसे नेतृत्व की जरूरत है जो चीन के इरादे को समझे और उससे सख्ती से निपटे।

तिब्बत की निर्वासित सरकार से आए तिब्बती कल्याण अधिकारी छेरिंग टाशी ने कहा कि चीन की रणनीति भारत के विभिन्न क्षेत्रों पर कब्जा करने की है। तिब्बत की आजादी ही भारत की सुरक्षा की गारंटी है।

उन्होंने भारत के केंद्रीय नेतृत्व का भी आह्वान किया कि वे चीन की हर चाल पर नजर रखेंगे तो ही देश सुरक्षित होगा।
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