होशियार सिंह ने बताया कि सात दिन तक बंकर में रहने के बाद उनका पोता पोलैंड के नजदीक बॉर्डर पर पहुंच गया है। सोमवार दोपहर बाद करीब ढाई बजे विवेक का फोन आया था। मंगलवार सुबह फिर 11 बजे पोलैंड के नजदीक किसी बॉर्डर पर पोते ने खुद को सुरक्षित बताया।
हेलो... दादा मैं सुरक्षित बंकर से निकलकर पोलैंड के साथ लगते एक देश के बॉर्डर तक पहुंच गया हूं। यहां से घर पहुंचने की जद्दोजहद कर रहा हूं। भारत जाने वाली एक फ्लाइट में उन्हें जगह नहीं मिली है। इसके बाद अचानक फोन कट गया। इससे पहले विवेक ने फोन पर दादा से बातचीत में ये शब्द कहे। पोते से बात के बाद दादा-दादी विवेक को लेकर चिंतित हो उठे और फूट-फूट कर रोने लगे। होशियार सिंह ने बताया कि सात दिन तक बंकर में रहने के बाद उनका पोता पोलैंड के नजदीक बॉर्डर पर पहुंच गया है।
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सोमवार दोपहर बाद करीब ढाई बजे विवेक का फोन आया था। मंगलवार सुबह फिर 11 बजे पोलैंड के नजदीक किसी बॉर्डर पर पोते ने खुद को सुरक्षित बताया। पोते की सुरक्षित वतन वापसी के लिए 70 हजार रुपये पांच दिन पहले उन्होंने उसके खाते में डाले हैं। बताया कि भारतीय छात्र की यूक्रेन में दर्दनाक मौत होने के बाद पोता दहशत में है। होशियार सिंह ने बताया कि पिछले सप्ताह पांच दिन के खाने के सामान के साथ वह बंकर में फर्श पर जागकर रातें काट रहा था। इधर, जोगिंद्रनगर प्रशासन भी दूरभाष पर विवेक से वहां के हालात के बारे में जान रहा है। बुजुर्ग दादा-दादी से भी संपर्क साध कर पौते को सुरक्षित आने का भरोसा दिलाया है।
यूक्रेन में बंकर से निकलकर सुरक्षित स्थान पर विवेक के होने की सूचना प्रशासन को मिली है वह जल्द ही सुरक्षित घर लौटेगा। प्रशासन अभिभावकों से भी संपर्क साध कर विवेक का कुशलक्षेम पूछ रहा है। - डॉ. मेजर विशाल शर्मा, एसडीएम जोगिंद्रनगर।