दिल्ली में पार्टी हाईकमान से मिलकर लौटे विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि मैं हर चुनौती को फ्रंटफुट पर खेलने में विश्वास रखता हूं। हिमाचल के छह बार मुख्यमंत्री रहे और उनके पिता दिवंगत वीरभद्र सिंह से यह सीख मिली है। चुनाव का जो माहौल प्रदेश व मंडी में विपक्ष बना रहा है, वह दुभार्ग्यपूर्ण है। चुनाव के दौरान मुद्दों और विकास की बात होनी चाहिए। अभी भाजपा प्रत्याशी कंगना केवल हिमाचलियत व मंडी की बेटी के नाम पर वोट प्राप्त करने में लगी हैं। प्रदेश की और भी बेटियां हैं, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। मेरी बहन भी मुख्य न्यायाधीश तक बनी हैं, लोकपाल तक बनी हैं। ऐसे में सिर्फ एक बेटी को प्राथमिकता देना अन्य बेटियों के साथ भेदभाव है। मैं कंगना का पूरा सम्मान करता हूं, लेकिन चुनाव के दौरान मुद्दों और विकास की बात ही करूंगा।
पार्टी का सिपाही हूं, चुनाव लड़ने को कहा तो पीछे नहीं हटूंगा
विक्रमादित्य ने कहा कि लोकसभा चुनाव और विधानसभा उपचुनाव में मजबूत प्रत्याशियों को उतारा जाएगा। स्क्रीनिंग कमेटी ने नाम 13 अप्रैल को प्रस्तावित केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के लिए भेज दिए हैं। इस बैठक में प्रत्याशियों की घोषणा होगी। मैं पार्टी का कर्मठ सिपाही हूं। आज जो भी हूं सिर्फ कांग्रेस पार्टी की वजह से हूं। पार्टी के आदेशों से पीछे हटने वालों में मैं नहीं हूं। केंद्र सरकार के सहयोग से 3000 करोड़ रुपये का बजट लाया गया। पार्टी जो भी जिम्मेवारी देगी, उसे निभाऊंगा। मैं मंडी का चुनाव प्रभारी हूं। वहां गया था, बैठकें भी की थीं। दिवंगत वीरभद्र सिंह तीन बार मंडी से सांसद बने। एक बार आपातकाल के दौरान ही वह चुनाव हारे। प्रतिभा सिंह ने पांच बार चुनाव लड़ा, तीन बार वह जीती हैं। मंडी के लोगों से मेरा भावनात्मक लगाव है।
जयराम ठाकुर सुबह लिए फैसलों को शाम को पलट देते थे
नेता विपक्ष जयराम ठाकुर के बयान पर कहा कि मुझे पूर्व मुख्यमंत्री से सर्टिफिकेट लेने की जरूरत नहीं है। यह जगजाहिर है कि वह मुख्यमंत्री रहते हुए सुबह लिए फैसलों को शाम तक पलट देते थे। अगर मैं इन फैसलों को गिनाने पर आया तो कई रातें गुजर जाएंगी। उन्हें सलाह रहेगी कि वह मुद्दों काे लेकर ही चर्चा करें। जयराम ठाकुर को तो राममंदिर के प्रतिष्ठा समारोह का निमंत्रण तक नहीं था। मुझे निमंत्रण मिला और मैं वहां गया भी। इसलिए जयराम से अनुरोध है कि कार्यकाल की बात करें, अपनी उपलब्धियों की बात करें, व्यक्तिगत टीका-टिप्पणी से बचें। वह बुद्धिजीवी है। वह जानते हैं कि क्या बोलना है क्या नहीं बोलना है। मैं उनको सिखाने वाला कोई नहीं होता हूं।