निर्दलीय विधायकों की सदस्यता रद्द करने की याचिका पर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल ने भाजपा से ओरिजिनल सबूत मांगे हैं। भाजपा की ओर से दायर की गई इस याचिका पर विस अध्यक्ष ने निर्देश जारी किए हैं कि इस संबंध में पेश किए गए फोटोस्टेट दस्तावेजों की बजाय ओरिजिनल कागजात पेश किए जाए।
भाजपा ने सितंबर 2014 में विस अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल के समक्ष एक याचिका दायर की थी, जिसमें मांग की गई थी कि निर्दलीय विधायकों के कांग्रेस से जुड़ने पर एंटी डिफेक्शन कानून के तहत उनकी प्रदेश विधानसभा की सदस्यता को रद्द किया जाए।
प्रदेश विधानसभा में ये याचिका भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती, भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक सुरेश भारद्वाज समेत कई अन्य भाजपा विधायकों के प्रतिनिधिमंडल ने दायर की थी। भाजपा विधायकों ने याचिका में आरोप लगाए थे कि इंदौरा के विधायक मनोहर धीमान, कांगड़ा के विधायक पवन काजल, पांवटा के विधायक किरनेश जंग और चौपाल के विधायक बलवीर सिंह वर्मा निर्दलीय चुनाव जीते थे।
लेकिन अब ये कांग्रेस से जुड़ गए हैं। भाजपा ने इन विधायकों पर जनता का विश्वास बरकरार नहीं रखने के भी आरोप लगाए हैं। कहा है कि ये संविधान की अनुसूची-10 के तहत अयोग्य करार दिए जा सकते हैं। इनकी सदस्यता रद्द की जाए।
'भाजपा सदस्यों ने याचिका के साथ फोटोस्टेट दस्तावेज दिए हैं। इनके स्थान पर ओरिजिनल कागजात मांगे गए हैं। इनका इंतजार किया जा रहा है। ये मिल जाते हैं तो याचिका पर फैसला हो जाएगा।'- बृज बिहारी लाल बुटेल, अध्यक्ष विस
'अभी तक प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष का हमें कोई पत्र नहीं मिला है। मिलने पर ही टिप्पणी कर पाएंगे। निर्दलीय विधायकों ने मीडिया को जारी प्रेस नोट में खुद को कांग्रेस से एसोसिएट लिखा है। इसमें उनके हस्ताक्षर भी हैं। हमारे पास अगला रास्ता है। भाजपा हस्ताक्षरों पर भी जांच मांग सकती है।'-सुरेश भारद्वाज, मुख्य सचेतक, भाजपा