रिवालसर के इंजीनियर सतीश कुमार
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उत्तराखंड के चमोली जलप्रलय में टनल के भीतर बिताए उन सात घंटों को हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के रिवालसर के इंजीनियर सतीश कुमार बुरे सपने की तरह भूल जाना चाहते हैं। मंगलवार तड़के चार बजे सतीश कुमार चमोली से अपने घर डहणू पहुंचे। उनके इंतजार में पूरा परिवार रात भर जागता रहा। सुबह घर पहुंचे तो मां और पत्नी ने जहां सतीश का सत्कार किया, वहीं सतीश का चार साल का बेटा दीक्षित पापा को देखकर खिलखिला उठा।
सतीश घर पहुंचा तो मां ने अपने बेटे को गले से लगा लिया और पत्नी ने पैर छूकर आशीर्वाद लिया। सभी ने भगवान का शुक्रिया जताते हुए सतीश की आरती उतारी। सतीश ने बताया कि टनल में गाद और पानी के बीच बिताए सात घंटे उनकी जिंदगी के सबसे भयावह क्षण रहे। वह कभी भी उन लम्हों को याद नहीं करना चाहता। जिंदा बचने से ज्यादा कोई खुशी नहीं। उन्होंने कहा कि वह छोटी काशी मंडी के देवी-देवताओं, माता-पिता और सगे-संबंधियों के आशीर्वाद से जिंदा बचे हैं। उन्होंने कहा कि शायद ही दोबारा वह उत्तराखंड की तरफ नौकरी के लिए रुख करें।