राजधानी शिमला में अक्तूबर माह से नई टैक्स पद्धति यूनिट एरिया मेथड के हिसाब से प्रापर्टी टैक्स वसूला जाएगा। 48 हजार से अधिक भवन मालिकों को अक्तूबर में तीन साल का प्रापर्टी टैक्स चुकाना होगा। शहर के भवन मालिकों से फरवरी 2012 से प्रापर्टी टैक्स वसूला जाना है। वर्ष 2012-13 और 2013-14 का टैक्स पुरानी पद्धति से वसूला गया है।
यूनिट एरिया मेथड लागू होने पर भवन मालिकों को इन दो सालों के संशोधित बिल जारी होंगे। इसके अलावा 2014-15 का टैक्स भी देना होगा। फरवरी 2012 में राज्य सरकार ने राजधानी में यूनिट एरिया मेथड के आधार पर टैक्स वसूली की अधिसूचना जारी की थी। नई टैक्स पद्धति को लेकर छिडे़ विवाद के चलते साल 2012-13 और 2013-14 में नगर निगम यूनिट एरिया मेथड से प्रापर्टी टैक्स नहीं वसूल सका।
रिवाइज होंगे टैक्स बिल
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद निगम ने पुरानी पद्धति के आधार पर उपभोक्ताओं से टैक्स वसूला था। नया मेथड लागू होने के बाद इन उपभोक्ताओं को जारी टैक्स बिलों का रिवीजन किया जाएगा। इसमें अगर किसी उपभोक्ता का टैक्स अधिक निकला तो उससे वसूली की जाएगी।
2014-15 के बिल एमसी ने जारी नहीं किए हैं। अब अक्तूबर में नगर निगम साल 2014-15 के बिल जारी कर देगा। ऐसे में उपभोक्ताओं को अब तीन साल का टैक्स एकसाथ चुकाना पड़ेगा। अक्तूबर के पहले सप्ताह से नगर निगम की कर शाखा बिल भेजना शुरू कर देगी। अब लोगों को नए टैक्स बिल का इंतजार है।
ग्रीन एरिया, कृषि भूमि को छूट पर फंसा पेंच
नगर निगम सदन ने यूनिट एरिया मेथड के बॉयलाज में ग्रीन एरिया और कृषि भूमि को छूट दी है। एकल महिला, विधवा, विकलांग, 70 साल की आयु से अधिक बुजुर्गों, एससी/एसटी बीपीएल को प्रापर्टी टैक्स में 50 फीसदी छूट देने को कहा है। सरकार ने नगर निगम को स्वयं फैसला लेने को अधिकृत किया है। ऐसे में नगर निगम एक्ट में संशोधन किए बिना छूट नहीं दे सकता है।
सेल्फ यूज पर छह प्रतिशत तक टैक्स
जोन ए में सेल्फ यूज वालों को एक से 100 वर्ग मीटर तक 3 प्रतिशत, जोन बी में 2 प्रतिशत, 101 वर्ग मीटर से अधिक पर जोन ए में 6 प्रतिशत और जोन बी में 4 प्रतिशत टैक्स लगेगा। नॉन रेजिडेंशियल प्रापर्टी पर जोन ए में 10 प्रतिशत और जोन बी में 5 प्रतिशत टैक्स लगेगा।
मर्ज एरिया पर भी लगेगा टैक्स
मर्ज एरिया के छह वार्डों में पंद्रह हजार से अधिक की आबादी भी टैक्स के दायरे में आएगी। ढली, चम्याणा, मल्याणा, पटयोग (न्यू शिमला), टुटू और कसुम्पटी वार्ड के लोगों को भी अब टैक्स देना होगा। साल 2007 में इन क्षेत्रों को निगम में शामिल किया था। इनसे पहली बार टैक्स वसूला जाएगा।