कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बाद लोगों के लिए अपना छोटा सा आशियाना खड़ा करना भी आर्थिक मुश्किलों से भरा हो गया है। भवन निर्माण सामग्री के दाम आसमान छू रहे हैं। मिस्त्री-मजदूरों की दिहाड़ी बढ़ने के साथ ही रेत, बजरी, सीमेंट, सरिया और बिजली के सामान के दाम भी तेजी पर हैं। हिमाचल में सीमेंट के कारखाने हैं लेकिन यहां पर सीमेंट के दाम दिल्ली व अन्य राज्यों से अधिक हैं। महंगाई के इस दौर में अब भवन का निर्माण कराना बेहद महंगा सौदा साबित हो रहा है। गरीब लोगों के लिए वन रूम सेट बनाना भी कठिन हो गया है।
कोरोना काल में सभी निर्माण कार्यों पर रोक लग गई थी। दूसरी लहर के कम होने के बाद लोगों ने भवन निर्माण व अन्य निर्माण कार्य अब शुरू कर दिए हैं। एक साथ काम खुलने से कच्चे माल की ब्लैक मार्केटिंग शुरू हो गई है। मांग के अनुसार माल न मिलने से अचानक हर चीज के रेट बढ़ गए हैं। सबसे अधिक सरिया के रेट बढ़े हैं। सरिया पहले चालीस रुपये प्रति किलो के हिसाब से मिल रहा था, लेकिन अब 60 रुपये प्रति किलो मिल रहा है। वहीं सीमेंट पहले 330 रुपये प्रति बैग था वह अब बढ़ कर 390 रुपये प्रति बैग हो गया है।
भवन निर्माण करने वाले ठेकेदार रमेश कुमार का कहना है कि मिस्त्री पहले पांच सौ रुपये दिहाड़ी लेता था, लेकिन अब सात सौ रुपये में भी नहीं मिल रहे हैं। रेत बजरी के दाम भी आसमान छूने लगे हैं। अवैध खनन होने के चलते रेत-बजरी के दाम अपनी मर्जी से वसूले जा रहे हैं। जिस रेट में जो ग्राहक मिल रहा है उसे वही रेट दिया जा रहा है। कोई भी फिक्स रेट नहीं है। ईंट के दाम में भी 1100 रुपये प्रति ट्राली बढ़ गए हैं। वहीं, उद्योग विभाग नालागढ़ के सदस्य सचिव विनीत कुमार ने बताया कि सरिया व सीमेंट के दाम कंपनी मांग व उत्पादन के आधार पर कम ज्यादा होते हैं। विभाग का इस पर कोई नियंत्रण नहीं है।
भवन निर्माण की सामग्री रुपयों में
निर्माण सामग्री पहले अब
रेत प्रति ट्राली 2380 2940
बजरी प्रति ट्राली 2520 3080
सरिया प्रति किलो 40 60
सीमेंट प्रति बैग 340 390
ईंट प्रति ट्राली 4500 5600
दिहाड़ी प्रति दिन 500 700