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कौल सिंह ने किया एलान, इस वर्ष तक टीबी मुक्त होगा हिमाचल

Wed, 30 Aug 2017 08:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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टीबी से मौत मामले में लगभग 38 प्रतिशत मामले तंबाकू से जुड़े हैं। टीबी के मामले धूम्रपान न करने वाले रोगियों के मुकाबले धूम्रपान करने वाले रोगियों में 3 गुणा ज्यादा पाए जाते हैं। यह बात स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने मंगलवार को राजधानी शिमला में कही।
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वह  टीबी एवं फेफड़ों के रोग की रोकथाम पर अंतरराष्ट्रीय संघ की ओर से प्रशिक्षक बैच के प्रशिक्षण पर आयोजित टीबी एवं तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि क्षयरोग नियंत्रण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। वर्ष 2025 तक राष्ट्र को टीबी मुक्त करने के लक्ष्य से पूर्व प्रदेश में यह लक्ष्य वर्ष 2021-22 तक प्राप्त कर लिया जाएगा। 

राज्य सरकार लोगों को चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए कृतसंकल्प है। राज्य में राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं योजनाएं राष्ट्रीय मानदंडों के अनुरूप कार्यान्वित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के स्वास्थ्य मानक राष्ट्रीय दर से कहीं बेहतर हैं। प्रदेश अब वैश्विक मानकों को प्राप्त करने की पूरी कोशिश कर रहा है।
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2.3 की राष्ट्रीय जन्म दर के मुकाबले प्रदेश में कुल जन्म दर 1.7 है, जबकि 37 की राष्ट्रीय नवजात शिशु मृत्यु दर के मुकाबले प्रदेश में यह दर 28 है। देश में पांच वर्ष की आयु से कम के शिशु की मृत्यु दर 43 है जबकि प्रदेश में यह दर केवल 33 है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हर वर्ष टीबी के 15 हजार नए मामले सामने आ रहे हैं।

लगभग 8 हजार से 9 हजार टीबी रोगी निजी चिकित्सा क्षेत्र में इलाज करवा रहे हैं और यह संख्या भी बहुत अधिक है। हिमाचल प्रदेश मुख्यमंत्री क्षय रोग निवारण योजना के तहत 2 करोड़ रुपये स्वीकृत करने वाला देश का पहला राज्य है। राज्य ने 26 जनवरी 2017 को टीबी रोगियों के लिए एफडीसी एवं प्रतिदिन खुराक आरंभ करने में भी प्रथम स्थान हासिल किया।

इसमें 7 हजार से भी ज्यादा रोगियों को प्रतिदिन खुराक प्रदान की जा रही है, ताकि एमडीआर टीबी रोगियों को पौष्टिक आहार प्रदान किया जा सके। संगोष्ठी में हिमाचल प्रदेश के अलावा पंजाब, हरियाणा तथा चंडीगढ़ से आए प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। 

राज्य सरकार ने प्रभावी तंबाकू नियंत्रण के लिए अनेक नए कदम उठाए हैं तथा राज्य में इनको लागू करने के लिए सुदृढ़ प्रणाली मौजूद है। इसके फलस्वरूप प्रदेश ने वर्ष 2013 में धूम्रपान मुक्त प्रदेश का दर्जा भी हासिल किया।
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