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रिलायंस टॉवर लाइन मामले में हाईकोर्ट ने डीसी से मांगा जवाब

Wed, 30 Aug 2017 08:58 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट
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हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत (सिंगल बेंच) ने रिलायंस टॉवर लाइन मामले में उपायुक्त बिलासपुर को 4 सप्ताह में शपथपत्र देने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने पूछा है कि 2015 में टॉवर लाइन निर्माण में मजिस्ट्रेट जांच में जो अनियमितताएं पाई गई हैं, उसके बाद जिला प्रशासन ने क्या कदम उठाए।
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अगर कोई कार्रवाई नहीं की तो क्यों नहीं की गई? इस संबंध में डीसी को हाईकोर्ट में शपथपत्र देकर जवाब देना होगा। पार्वती कोलडैम टॉवर लाइन निर्माण के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गई हैं। 2015 में मजिस्ट्रेट जांच में यह बात साफ हो गई है। इसके बाद भी जिला प्रशासन ने प्रभावितों को राहत देने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

रिलायंस कंपनी के खिलाफ पुलिस में भी कई शिकायतें दी गईं, लेकिन प्रभावितों को कोई राहत नहीं मिली। टॉवर लाइन जागरूकता मंच के प्रदेश संयोजक रजनीश शर्मा ने बताया कि टॉवर लाइन निर्माण के दौरा रातों-रात हरे पेड़ काटे गए थे। इसके लिए संबंधित विभाग और पंचायत से एनओसी नहीं लिया गया था।
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यहां तक कि उपायुक्त कार्यालय में जरूरी दस्तावेज तक जमा नहीं करवाए गए हैं। इसकी पुष्टि आरटीआई से ली गई सूचना से हो चुकी है। प्रभावितों की मांग पर 2015 में मामले की मजिस्ट्रेट जांच करवाई गई। जांच टीम ने 28 अक्तूबर, 2015 को रिपोर्ट जमा करवाई थी। इसमें टॉवर लाइन निर्माण में भारी अनियमितताएं पाई गई थीं। जिस पर हाईकोर्ट ने उपायुक्त को शपथ पत्र जमा करवा कर पूछा है कि जिला प्रशासन ने प्रभावितों के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। 

डीसी बिलासपुर से चार हफ्ते में रिपोर्ट तलब
पार्वती कोल डैम ट्रांसमिशन कंपनी के खिलाफ  बरती गई कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में हाईकोर्ट सुनवाई हुई। कोर्ट ने जिलाधीश बिलासपुर को आदेश दिए कि जांच कमेटी द्वारा सौंपी रिपोर्ट की एवज में जो भी कदम उठाए हैं, उसकी जानकारी हाईकोर्ट को 4 सप्ताह में शपथपत्र के माध्यम से दें।

न्यायाधीश संदीप शर्मा ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड के अवलोकन के दौरान पाया कि 28 अक्तूबर, 2015 के पत्राचार के अनुसार स्थानीय निवासियों द्वारा कंपनी के खिलाफ  लगाए गए आरोपों की जांच के लिए जांच कमेटी का गठन किया था। जांच के बाद जिलाधीश को सौंपी रिपोर्ट के अनुसार पार्वती कोल डैम ट्रांसमिशन कंपनी ने ट्रांसमिशन लाइन बिछाने से पूर्व सक्षम अधिकारियों से कई तरह की स्वीकृतियां प्राप्त नहीं की थीं। मामले पर सुनवाई 3 अक्तूबर को होगी।

हाईकोर्ट ने मीडिया घराने के खिलाफ दर्ज शिकायत खारिज
हाईकोर्ट ने आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के संयोजक और रबीता मदरिस दारुल उलूम देवबंद उत्तरप्रदेश के सदस्य मौलाना मुमताज अहमद कासमी की एक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया घराने सहित कुछ संवाददाताओं के खिलाफ  न्यायिक दंडाधिकारी शिमला के समक्ष दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत को खारिज कर दिया।
हालांकि, कोर्ट ने एक अन्य मीडिया घराने के रिपोर्टरों के खिलाफ  दर्ज आपराधिक मानहानि की शिकायत को खारिज करने से इनकार कर दिया। मामले के अनुसार शिकायतकर्ता ने न्यायिक दंडाधिकारी शिमला के समक्ष एक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया घराने और संवाददाताओं के खिलाफ  शिकायत दर्ज की थी। आरोप लगाया था कि 27 दिसंबर, 2006 को आरोपी चैनल ने हज के दलाल नामक शीर्षक से एक खबर प्रसारित की थी।   इससे प्रार्थी की छवि पर विपरीत प्रभाव पड़ा। इस कारण उसे विभिन्न पदों से इस्तीफा देना पड़ा। खबर में एक स्टिंग ऑपरेशन के माध्यम से बताया गया था कि शिकायतकर्ता ने कुछ अनाधिकृत लोगों को हज यात्रा कराने की एवज में ढाई लाख रुपये रिश्वत की मांग की।
इस शिकायत पर 1 अप्रैल 2015 को न्यायिक दंडाधिकारी शिमला द्वारा आरोपियों को समन जारी किए गए थे। हाईकोर्ट में इन आरोपी प्रार्थियों ने समन जारी करने के बाद आदेश को चुनौती दी थी। कोर्ट ने प्रार्थियों के खिलाफ  दर्ज शिकायत पर जारी समन को आपराधिक प्रावधानों के खिलाफ  पाते हुए शिकायत को खारिज करने के आदेश पारित किए।
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