फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आईजीएमसी में दूसरे दिन भी डॉक्टरों ने काम छोड़कर जारी रखी सांकेतिक हड़ताल

विज्ञापन
Trained Doctor strik in IGMC
विज्ञापन
आईजीएमसी में जूनियर डॉक्टरों ने संभाला मोर्चा
विज्ञापन

आज मुख्यमंत्री जयराम से भी मिलेंगे प्रशिक्षु
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (आईजीएमसी) के प्रशिक्षु चिकित्सकों की नौकरी की मांग को लेकर चल रही हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। अस्पताल के 100 प्रशिक्षु चिकित्सकों ने इस दौरान इलाज के लिए आए मरीजों के घावों पर टांका तक नहीं लगाया। इसके अलावा न ही ड्रेसिंग का काम किया। यह वह चिकित्सक हैं जो अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके हैं और अब विभिन्न विभागों में बतौर इनर्टशिप सेवाएं दे रहे हैं।
आपात स्थिति में आए मरीजों के अलावा वार्डों से उपचार संबंधी डाटा भी इकट्ठा नहीं किया। इनकी जगह जूनियर डॉक्टरों ने मोर्चा संभालकर रखा और मरीजों को उपचार दिया। इससे मरीजों को कोई परेशानी पेश नहीं आई। आईजीएमसी, टांडा और नाहन मेडिकल कॉलेजों के करीब 300 प्रशिक्षु डॉक्टरों की इंटर्नशिप की अवधि 6 मई को खत्म हो रही है। इसलिए सभी प्रशिक्षु चिकित्सक सरकार से नौकरी देने की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रशिक्षु डॉक्टरों ने बताया कि वह इस मामले को लेकर शुक्रवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से भी मिलेंगे। आईजीएमसी के प्रशिक्षु डॉ. रजत, डॉ. सुशांत, डॉ. शमी, डॉ. कुलभूषण और डॉ. शिवम ने बताया कि इंडियन जनरल ऑफ मेडिसिन के रिसर्च पेपर के अनुसार हिमाचल की जनसंख्या 75 लाख के करीब है। प्रदेश के स्वास्थ्य संस्थानों में करीब 75 सौ चिकित्सकों की आवश्यकता है। अभी 2,412 डॉक्टर ही प्रदेश में सेवाएं दे रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण हल्कों में डॉक्टरों की भारी कमी है। सरकार को चाहिए कि वह मेडिकल कॉलेजों से इंटर्नशिप करके निकलने वाले इन डॉक्टरों को नौकरी दें। इससे स्वास्थ्य केंद्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सुधरेंगी।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें