अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए महिलाओं को बुला रहे दो सप्ताह बाद अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कमला नेहरू अस्पताल (केेएनएच) से अल्ट्रासाउंड के लिए इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में प्रसूता महिलाओं (गर्भवती या हाल ही में मां बनी) को भेजा जा रहा है। केएनएच में स्थापित अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने से महिलाएं परेशान हो गई हैं।
हैरत की बात तो यह है कि वार्ड में भर्ती प्रसूता महिलाओं को भी अल्ट्रसाउंड के लिए आईजीएमसी भेज रहे हैं। इससे महिलाएं अल्ट्रासाउंड के लिए एक से दूसरे अस्पताल के चक्कर काटने पर मजबूर हैं। ऐसे में प्रसूति महिलाओं को काफी समस्या झेलनी पड़ रही है। महिलाओं की परेशानियां यहीं खत्म नहीं होती है बल्कि आईजीएमसी जाकर ओर बढ़ जाती है। महिलाएं पहले तो कतार में लगकर अल्ट्रासाउंड के लिए पर्ची कटवाती हैं। इसके बाद जब नंबर लगवाने के लिए जाती हैं तो उन्हें कम से कम दो सप्ताह का समय मिलता है। ऐसे में महिलाओं के हाथ निराशा लग रही है। महिलाओं को मजबूरी में निजी क्लीनिकों में अल्ट्रासाउंड करवाने पर मजबूर होना पड़ता है। इसके बाद महिलाओं को फिर आकर भर्ती होना पड़ता है। निजी क्लीनिकों में अल्ट्रासाउंड करवाने से महिलाओं को सरकार की ओर से मिलने वाली मुफ्त सुविधा का लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। प्रसूति महिलाओं को निजी क्लीनिकों में अल्ट्रासाउंड के 700 रुपये तक अदा करने पड़ रहे हैं। इससे जेब का खर्च भी काफी बढ़ गया है। हालांकि अस्पताल में नई मशीन आ गई है, लेकिन उसे स्थापित नहीं किया है। गौरतलब है कि केएनएच में अल्ट्रासाउंड मशीन को लगाए काफी वर्ष हो गए हैं। इसमें अल्ट्रासाउंड साफ नहीं आता है। इससे जांच में काफी दिक्कतें आती है। ओपीडी समेत वार्ड से महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए आईजीएमसी भेजा जाता है।
प्रसूता महिला को गायनी दिक्कत, भेजी आईजीएमसी
ओपीडी शिफ्ट होने से महिला मरीज असमंजस में है। प्रसूता महिलाओं को गायनी की दिक्कत होने पर आईजीएमसी भेजा जा रहा है। बुधवार को भी तीन ऐसे ही मामले केएनएच से आईजीएमसी भेजे हैं। महिलाओं का कहना है कि सरकार ने ओपीडी को शिफ्ट करने के बाद असमंजस में डाल दिया है। पहले दोनों उपचार एक ही जगह मिल जाते थे। अब पहले प्रसूता उपचार के लिए केएनएच आना पड़ता है। इसके बाद गायनी की कोई दिक्कत आती है तो आईजीएमसी में भागना पड़ता है।
इनसेट कुछ मामलों में अल्ट्रासाउंड के लिए आजीएमसी भेजा जाता है। अब जल्द ही नई मशीन स्थापित हो जाएगी। इसके बाद मरीजों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। -सुंदर नेगी चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी