कमला नेहरू अस्पताल से गायनी ओपीडी आईजीएमसी शिफ्ट करने का विरोध, महिलाओं ने 24 घंटे का धरना किया शुरू
विज्ञापन
क्रॉसर
सरकार को चेतावनी, फैसला वापस न लिया सचिवालय घेरेंगे
आईजीएमसी में हो रही परेशानी, टेस्ट के लिए लग रहीं कतारें अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) से गायनी ओपीडी और वार्ड को इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट करने के विरोध में महिलाओं ने बुधवार को केएनएच परिसर में प्रदर्शन किया। अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति के बैनर तले महिलाओं ने इस दौरान सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। साथ ही महिलाओं ने 24 घंटे का धरना भी शुरू कर दिया है। यह धरना दोपहर 12:00 बजे शुरू हुआ और वीरवार दोपहर 12:00 बजे तक चलेगा।
धरने में महिलाओं ने न केवल सरकार के खिलाफ बल्कि स्वास्थ्य के निजीकरण को लेकर भी चेताया। महिलाओं ने स्वास्थ्य से खिलवाड़ नहीं चलेगा..., स्वास्थ्य का निजीकरण..., गायनी ओपीडी वापस लाओ..., प्रदेश सरकार होश में आओ..होश में आकर काम करों... जैसे नारे लगाए। इस दौरान महिलाओं ने चेतावनी भी दी कि अगर सरकार फैसला वापस नहीं लेती है तो सचिवालय का घेराव किया जाएगा। 30 अप्रैल का समय महिलाओं ने सरकार को दिया है। इसके बाद महिलाएं सचिवालय घेराव के लिए कूच करेगी। इससे पहले 13 अप्रैल को महिलाओं ने केएनएच में प्रदर्शन किया था। इस दौरान महिलाओं भी सरकार को महिलाओं ने चेताया था।
विज्ञापन
विरोध के बीच केएचएच में गायनी ओपीडी में उपचार और वार्ड की सुविधाएं देना बंद कर दिया। अब विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। महिलाओं ने कहा कि जब से आईजीएमसी में ओपीडी को शिफ्ट किया है तब से मरीज परेशान हो रहे हैं। कई मरीजों को जानकारी ही नहीं है। ऐसे में वह मरीज पहले केएनएच आते हैं, इसके बाद पर्ची काउंटर से लौटते हैं।
महिलाओं का आरोप है कि सरकार ने मनमर्जी से कैबिनेट में निर्णय लेकर एक अप्रैल को ओपीडी को शिफ्ट कर दिया। इसके बाद 16 अप्रैल से केएनएच में गायनी से संबंधित उपचार को बंद कर दिया। ओपीडी शिफ्ट करने के बाद महिलाओं को सुविधाएं तक नहीं दी जा रहीं। मरीजों के साथ कर्मचारी भी परेशान हो गए हैं। चेंजिंग रूम तक स्टाफ के लिए नहीं बनाया है। मरीजों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं है। मात्र एक रोबोटिक सर्जरी के लिए एक स्थायी अस्पताल को ऐसे अस्पताल में मर्ज कर दिया है जहां पहले से ही काफी भीड़ है। महिलाओं को टेस्ट तक करवाने के लिए कतारों में लगना पड़ रहा है, जबकि केएनएच में इस प्रकार से नहीं होता था।
ऑपरेशन तक नहीं हो पा रहा शुरू
महिलाओं ने कहा कि ऑपरेशन थियेटर आईजीएमसी में तैयार नहीं हुआ है। केएनएच से मशीनरी को भेजा जा रहा है। ऐसे में अभी तक लेप्रोस्कोपी से ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल रही है। इसमें जिन महिला मरीजों ने ऑपरेशन का समय लिया था। वह भी धक्के खाने पर मजबूर हैं और आगामी दिनों में फिर ऑपरेशन की तिथि लेनी पड़ेगी।
कोट
सरकार विधायकों को फायदा देना चाहती है। महिलाओं के स्वास्थ्य से सरकार का कोई लेना-देना नहीं है। अपनी मर्जी से निर्णय लिए जा रहे हैं। महिलाओं को परेशान करने का कार्य सरकार कर रही है। गायनी और प्रसूति विभाग दोनों एक-दूसरे के पूरक है फिर भी सरकार इन्हें अलग करना चाहती है। अगर सरकार निर्णय वापस नहीं लेती है तो सचिवालय का घेराव 30 अप्रैल को होगा। -फालमा चौहान, राज्य सचिव, अखिल भारतीय जनवादी महिला समिति