परेटकर ने कहा कि यह पहली ऐसी सुरंग है, जिसमें रोवा फ्लायर टेक्नालॉजी का उपयोग किया गया है। यह तकनीक विपरीत स्थिति में इंजीनियरों को काम करने में सक्षम बनाती है। सुरंग बनने में हुई देरी की मुख्य वजह 410 मीटर लंबा सेरी नाला है। यह नाला हर सेकेंड 125 लीटर से अधिक पानी निकालता है। सेरी नाला क्षेत्र में ही सुरंग का दक्षिणी द्वार पड़ता है। कमजोर भू-वैज्ञानिक परिस्थितियों के चलते इंजीनियरों को इस क्षेत्र में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। इसकी वजह से बार-बार सुरंग का दरवाजा बंद हो जाता था।
इंजीनियरों और मजदूरों ने दस साल की कड़ी मेहनत
सीमा सड़क संगठन ने वर्ष 2009 में शापूरजी पोलोनजी समूह की कंपनी एफकॉन और ऑस्ट्रिया की कंपनी स्टारबैग के संयुक्त उपक्रम को इस टनल के निर्माण का ठेका दिया और इसके निर्माण कार्य में एक दशक से अधिक वक्त लगा। एफकॉन ने इस सुरंग के निर्माण में करीब 150 इंजीनियरों और एक हजार श्रमिकों को लगाया था।