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Shimla News: कलाई पर बंधेगा पहाड़ का हुनर, महिलाओं ने तैयार कीं राखियां

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ईविल आई, हार्ट शेप और फूलों के डिजाइन वाली राखियों की बाजार में है विशेष मांग
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टुटू और बनूटी में पाइन नीडल से भी बनाए सुंदर डिजाइन
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के ग्रामीण इलाकों की महिलाएं रक्षाबंधन के त्योहार के लिए विशेष राखियां तैयार कर रही हैं। टुटू-बनूटी और धामी की महिलाएं हाथों से इन राखियों को तैयार कर रही हैं। इनमें चीड़ की पत्तियों और ऊन के रंगीन धागों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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महिलाएं ऊन के धागों से ईविल आई, हार्ट शेप और फूलों के आकर्षक डिजाइन तैयार कर रही हैं। यह पहल स्थानीय हस्तकला को बढ़ावा देने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद कर रही हैं। ग्रामीण महिलाएं इन आकर्षक डिजाइनों को बड़ी कुशलता से तैयार कर रही हैं। राखियां बनाने में पारंपरिक तकनीकों के साथ स्थानीय सामग्रियों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे महिलाओं को घर बैठे आय का साधन मिल रहा है और वह आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। इस वर्ष टुटू-बनूटी क्षेत्र में पाइन नीडल से भी राखियों के अनूठे डिजाइन तैयार किए जा रहे हैं। पाइन नीडल से बनी यह राखियां प्राकृतिक सुंदरता के साथ पर्यावरण-अनुकूल होने के कारण भी खास हैं। इन हस्तनिर्मित राखियों को स्थानीय बाजारों में बिक्री के लिए उपलब्ध करवाया जाएगा। महिलाएं यह राखियां हेल्पिंग हैंड संस्था की ओर से आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में तैयार कर रही हैं। इसके लिए संस्था की प्रशिक्षक सुनीता शर्मा और चंपा देवी महिलाओं को विशेष मार्गदर्शन दे रही हैं। प्रशिक्षक सुनीता शर्मा ने बताया कि हर वर्ष महिलाएं नई रचनात्मकता के साथ राखियां तैयार करती हैं। इस वर्ष ईविल आई, हार्ट और फूलों के डिजाइन को चीड़ की पत्तियों और ऊन के रंग-बिरंगे धागों से तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राखियां भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का प्रतीक हैं। टुटू-बनूटी में पाइन नीडल का इस्तेमाल कर भी विशेष राखियां बनाई जा रही हैं। प्राकृतिक सामग्री से तैयार इन राखियों को अनूठा और पर्यावरण-अनुकूल रूप मिल रहा है।
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